जिन सवर्णों ने भाजपा को बनाया अब वही सवर्ण भाजपा से हो रहे दूर भाजपा देख कर भी कर रही अनदेखा
भारतीय जनता पार्टी की नींव सवर्ण वर्ग ने रखी थी यही कारण था कि भाजपा में लंबे समय तक (ब्राह्मण और बनिया) की पार्टी होने का ठप्पा लगा रहा। अटल बिहारी बाजपेयी भाजपा के पहले और आखिरी नेता थे जो सवर्ण होकर देश के सर्वोच्च पदों पर पहुंचे। लेकिन मोदी युग आते-आते भाजपा ने सत्ता में बने रहने के लिए अन्य वर्गों को हथियार के रुप में इस्तेमाल किया और उसका परिणाम यह निकला कि जिस सवर्ण वर्ग ने भाजपा की स्थापना की थी आज उसी सवर्ण वर्ग को धीरे-धीरे करके सत्ता से दूर किया जा रहा है। भाजपा उन्हीं सवर्णों को आगे लेकर जाती है जो सवर्ण होकर भी पिछड़ों की तरह है। मतलब किसी सवर्ण वर्ग को सरकार अथवा संगठन में पद चाहिए तो उसे अपनी जुवान बंद रखनी पड़ेगी अन्यथा उसे पार्टी में साइड लाइन कर दिया जाएगा। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण दतिया उप चुनाव में पूर्व गृह मंत्री डाक्टर नरोत्तम मिश्रा है। पूर्व गृह मंत्री एक ऐसे नेता हैं जो सवर्ण वर्ग में खास कर ब्राह्मण वर्ग के सर्वमान्य नेता माने जाते हैं। एक योग्य और अनुभवी नेता होने के नाते समय आने पर वो बोलते भी हैं। जहां भी सवर्णों के साथ गलत होता देखते हैं वहां पर खड़े भी होते हैं। जिसके कारण डाक्टर नरोत्तम मिश्रा भाजपा नेताओं के आंख की किरकिरी बन गए। भाजपा नेताओं ने ऐसी चाल चली कि नामांकन से ठीक एक दिन पहले उनकी जगह पर सवर्ण वर्ग के ही दूसरे नेता आशुतोष तिवारी के नाम का ऐलान कर दिया लेकिन दतिया की जनता ने यह बता दिया कि उसके दिल में डाक्टर नरोत्तम मिश्रा ही बसते हैं। लिहाजा वहां की जनता ने आशुतोष तिवारी को पूरी तरह से रिजेक्ट कर दिया। पूर्व गृह मंत्री का टिकट कटने के कारण आज पूरे मध्य प्रदेश में न सिर्फ ब्राह्मण वर्ण बल्कि सवर्ण वर्ग में आने वाले क्षत्रिय,वैश्य सभी भाजपा नेतृत्व से नाराज हो चुके हैं। सवर्ण वर्ग के प्रत्येक नागरिक की जुवां पर एक ही सवाल है कि भाजपा अगर नरोत्तम मिश्रा के साथ ऐसा कर सकती है तो दूसरों की क्या बिसात है।
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