इतिहास में सबसे कमजोर विपक्ष सरकार के आगे बेबस सिर्फ 'मदारी' का खेल दिखा कर ध्यान खींचने की कोशिश
मप्र का पांच दिवसीय विधानसभा सत्र अनिश्चितकाल तक के लिए स्थगित हो गया। चार बैठकों में कांग्रेस के नुक्कड़ नाटक के अलावा विपक्ष की भूमिका संदेह के दायरे में बनी रही। सरकार ने अपने सभी जरुरी काम बिना किसी बाधा के पूरे कर लिए। नगर पालिक अधिनियम, दुकान एवं स्थापना संचालन संशोधन और द्वितीय अनुपूरक बजट पारित करा लिया। लोक महत्व में प्रकृतिक आपदा को लेकर विशेष चर्चा भी करा दी लेकिन विपक्ष सरकार को घेरने में पूरी तरह से नाकाम रहा। विपक्ष किसी भी मुद्दे पर छाप नहीं छोड़ पाया। सदन के बाहर प्रदर्शन कर मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के अलावा कांग्रेस विधायकों ने और कुछ नहीं किया। जबकि वो सदन में कानून व्यवस्था,आइएएस संतोष वर्मा के विवादित बयान सहित अन्य विषयों पर सरकार को घेर सकते थे लेकिन कांग्रेस विधायक सदन के अंदर हंसी ठिठोली के अलावा एक दूसरे का मुंह ही ताकते रह गए। कांग्रेस विधायकों ने एक बार फिर बता दिया कि उनका होमवर्क कितना कमजोर है। वो सिर्फ मीडिया तक ही सीमित हैं। कांग्रेस के कुछ गिने चुने विधायकों ने सरकार को घेरने की कोशिश भी की तो सत्ता पक्ष ने उन्हें ऐसे लपेटा की कांग्रेस विधायकों की दोबारा जुवान ही नहीं खुली। विपक्ष के पास मुद्दों की कमी नहीं थी लेकिन सत्ता पक्ष से लड़ने के संकल्प की कमी जरुर थी जो विधानसभा के चारों दिन देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष के रुप में कांग्रेस ने उमंग सिंघार को आगे किया है लेकिन उनकी शैली नेता प्रतिपक्ष के विपरीत जाती दिखती है। ऐसा लगता है कि विधानसभा की सारी कार्यवाही पहले से ही स्क्रिप्टेड थी जो सिर्फ खाना पूर्ति के लिए संचालित हो रही थी। ये कांग्रेस के विधायकों का हाल है और ठीक इसी प्रकार संगठन का हाल भी है। जो सिर्फ दिखावे के कार्य कर यह सोच कर बैठ जाता है कि अगली सरकार तो हमारी ही होगी।
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