संतोष वर्मा की जगह 'ब्राह्मण' अधिकारी बयान देता तो क्या सरकार अब तक चुप रहती

Dec 6, 2025 - 09:48
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संतोष वर्मा की जगह 'ब्राह्मण' अधिकारी बयान देता तो क्या सरकार अब तक चुप रहती

आइएएस संतोष वर्मा ने जिस प्रकार से ब्राह्मण बेटियों के खिलाफ अपशब्द बोला उसके बाद प्रदेश भर में जमकर विरोध प्रदर्शन हुए जो अब तक लगातार जारी हैं। लेकिन राज्य सरकार ने संतोष वर्मा मामले को वोट की कसौटी से परख कर उस मामले को एक किनारे कर दिया है और ऐसा लग रहा है मानो सरकार को ब्राह्मणों के प्रदर्शन से कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा है। यहां पर इतने प्रदर्शनों और उनकी उपेक्षाओं से एक और बात स्पष्ट होती नजर आ रही है कि जुवानी अपशब्दता को सरकार वोटबैंक के तराजू से तौल रही है। संतोष वर्मा की जगह अगर कोई स्वर्ण वर्ग का अधिकारी अन्य वर्ग की बेटियों के खिलाफ बोला होता तो क्या सरकार अब तक चुप रहती। इससे पूर्व शिवराज सरकार में हल्की सी भूल में स्वर्ण वर्ग के अधिकारियों पर सरकार की कार्यवाही देखने को मिल चुकी है। और अब जिस प्रकार से संतोष वर्मा ने बयान दिया उसके बाद सरकार कान में रुई डाल कर बैठी है। सरकार अपने इस रवैए से इस बात का अहसास करवा रही है कि उसे ब्राह्मणों की जरुरत नहीं है। मतलब साफ है कि सरकार ने इतने दिन में अपना नजरिया स्पष्ट कर दिया है। लेकिन उसके बाद भी ब्राह्मण वर्ग इस मामले पर कार्रवाई के लिए अड़ा हुआ है। वहीं सरकार में  मौजूद ब्राह्मण वर्ग के प्रतिनिधियों ने दिखावे के लिए सरकार को ज्ञापन जरुर दिया लेकिन उन्होंने दबाव बनाने की कोशिश नहीं की। जबकि भाजपा और कांग्रेस में मिला कर 60 से अधिक नेता विधायक हैं। वहीं दूसरी तरफ भाजपा के संगठन में कई ब्राह्मणों की नियुक्तियां हुई हैं लेकिन वो सीएम के अहसान तले इतने लंबे हैं कि कार्यवाही करने के लिए कुछ बोल ही नहीं सकते हैं। यानि ब्राह्मण वर्ग की एक बड़ी संख्या होने के बाद भी इस वर्ग के जनप्रतिनिधि अपनी जुवान खोलने से डर रहे हैं। क्योंकि उन्हें आगे भी चुनाव लड़ना है। जिसमें सबके सामने उन्हें हाथ जोड़ना है। इसलिए जनप्रतिनिधि कुछ बोल नहीं पा रहे और सरकार पूरे मामले में कुछ करने के मूड में नहीं दिख रही है।

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