CM की 'जमीन' खोदने पर कुछ नहीं मिला तो कांग्रेस 'मौन' और कार्यकर्ता 'बेचैन' हुए जिसने विरोध किया उसको कारण बताओ नोटिस जारी हुआ
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी की लाख कोशिशों के बाद भी वो भाजपा विरोधी माहौल बनाने में नाकाम रहे। तरह-तरह के षड़यंत्र किया आरोप लगाया फिर भी नाकाम रहे। एक अंग्रेजी अखबार ने सीएम पर जमीन खरीदी का आरोप लगाया तो कांग्रेस अध्यक्ष को लगा कि उनके हाथ अल्लादीन का चिराग लग गया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने उस चिराग को पहले भोपाल में घिसा लेकिन जिन्न नहीं निकला फिर उस चिराग को दिल्ली में घिसा गया लेकिन वहां भी जिन्न प्रगट नहीं हुआ। गाहे बगाहे पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने ये कह कर कसर निकाल दी कि जीतू पटवारी को तत्थ्यों की जानकारी नहीं है। जीतू पटवारी अपने नेता का विरोध नहीं कर पाए तो उन्होंने एक फरमान जारी कर कहा कि मीडिया कांग्रेस के मुद्दों को प्रमुखता से नहीं उठाती लिहाजा कांग्रेस तीन दिन के लिए मौन सत्याग्रह पर रहेगी। पटवारी ने इधर मौन का ऐलान किया तो अन्य कार्यकर्ताओं की बेचैनी बाहर आ गई। इंदौर के चलते राकेश यादव का ग़ुस्सा अनकंट्रोल हो गया। उन्होंने एक प्रेसवार्ता आयोजित कर कह दिया कि जीतू पटवारी अध्यक्ष पद के लिए डिजर्व ही नहीं करते हैं। इस बयान के आधार पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। लेकिन हकीकत तो यह है कि इस वक्त कांग्रेस अध्यक्ष पर पार्टी में चारों तरफ असंतोष की स्थिति बनी हुई है। पिछले साल जो संगठन सृजन अभायान चलाया गया था। वो एक झटके में मिट्टी में मिल गया। जिन्हें जीतू पटवारी ने जिला अध्यक्ष बनाया वही जिला अध्यक्ष अब जीतू पटवारी पर विश्वास नहीं कर रहे हैं। मुखबिर को मिली सूचना के अनुसार कांग्रेस के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में भाजपा की सदस्यता लेने की योजना बना रहे हैं। क्योंकि अब कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पार्टी में अपना भविष्य नहीं दिख रहा है। दरअसल जीतू पटवारी को कांग्रेस के बड़े नेता आज तक अपना नेता स्वीकार नहीं कर पाए और कांग्रेस एक ऐसी पार्टी है जो नेताओं से चलती है। लिहाजा मालवा अंचल में दिग्विजय सिंह और अरुण यादव जैसे नेताओं के नाराज होने का नुक़सान कांग्रेस को भुगतना पड़ रहा है तो वहीं विंध्य में अजय सिंह (राहुल) की नाराजगी के कारण कार्यकर्ता पार्टी और जीतू पटवारी पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं।
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