संतोष वर्मा मामले में कांग्रेस चुप क्यों क्या सिर्फ चुनाव में ही ब्राह्मणों के वोट चाहिए
ब्राह्मण बेटियों को आइएएस संतोष वर्मा द्वारा अपशब्द कहने के मामले में कांग्रेस का रवैया अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। कांग्रेस के कुछ ब्राह्मण विधायकों में हेमंत कटारे जैसे नेताओं ने इस मामले में जरुर गंभीरता दिखाई लेकिन प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने इस पूरे मामले में अब तक चुप्पी साध रखी है। यहां तक कि सत्ता पक्ष के कुछ ब्राह्मण विधायकों ने खुल कर मोर्चा खोलने की हिम्मत दिखाई है। इतना सबकुछ होने के बाद भी कांग्रेस पूरे मामले में मौन धारण करके बैठी है। ऐसा लगता है कि कांग्रेस को सिर्फ आदिवासी वर्ग का ही वोट चाहिए। जबकि इतिहास गवाह है कि जब-जब स्वर्ण वर्ग भाजपा से नाराज हुआ और कांग्रेस की तरफ आया तो कांग्रेस का पलड़ा भारी रहा है। लेकिन कांग्रेस की युवा सोच अभी तक इस गणित को समझ पाने में नाकाम रही और संतोष वर्मा मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने चुप्पी साधे रखने में अपनी और पार्टी की भलाई समझ रखी है। इससे यह भी समझ में आता है कि बेटियों के सम्मान की बात करने वाली कांग्रेस के नेता स्वर्ण बेटियों के सम्मान के बारे में कितनी गंभीर हैं। विधानसभा का सत्र समाप्ती की ओर है विपक्ष में बैठे किसी भी कांग्रेस विधायक ने ध्यानाकर्षण के माध्यम से सरकार का ध्यान आकृष्ट करने की कोशिश नहीं की। अगर कांग्रेस ऐसा करती तो उसे एक बड़ा जन समर्थन मिल सकता था लेकिन कांग्रेस ने अपने हाथ में आए इतने बड़े मौके को छोड़ दिया। कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी अपनी पार्टी का स्टैंड अब तक क्लियर नहीं कर पाए। कि ब्राह्मण बेटियों के सम्मान में कांग्रेस क्या करने वाली है। कांग्रेस पार्टी लगातार आदिवासियों को साधने की कोशिश कर रही है और उसकी इस प्रतिक्रिया के चलते न सिर्फ ब्राह्मण वर्ग बल्कि पूरा स्वर्ण वर्ग कांग्रेस से अलग होता चला जा रहा है। जिस वक्त ब्राह्मण वर्ग को कांग्रेस के सपोर्ट की सबसे ज्यादा जरुरत थी उस वक्त कांग्रेस के बड़े नेता अंधे और बहरे बने कर बैठे हैं विधानसभा में नुक्कड़ नाटक कर खुद का मनोरंजन कर खुद ही वाहवाही कर रहे हैं। जबकि सदन के अंदर सत्ता पक्ष के आगे वो चारों खाने चित्त हो रहे हैं।
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