कहीं उल्टा न पड़ जाए भाजपा कार्यालय में मंत्रियों को बैठाने का दांव लगातार बढ़ रही कार्यालय में भीड़
भारतीय जनता पार्टी ने पार्टी के कार्यकर्ताओं को खुश करने के लिए हफ्ते में पांच दिन प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों को बैठने का निर्देश दिया है। नेतृत्व के आदेश का पालन भी शुरु हो गया है। सोमवार से रोजाना दो मंत्री प्रदेश कार्यालय में बैठ कर जनसुनवाई करने लगे हैं। पहले हफ्ते के पहले दिन तो कार्यकर्ताओं को पता ही नहीं चला कि मंत्री कार्यालय में मिलेंगे। मंगलवार से यह खबर आग की तरह फैली और कार्यकर्ताओं का प्रदेश कार्यालय में आना शुरु हो गया। भीड़ का सिलसिला दिन प्रति दिन बढ़ता जा रहा है। कार्यालय में बैठने वाले मंत्रियों के पास आने वाले कार्यकर्ता लगातार पत्र लेकर पहुंच रहे हैं। फिलहाल तो मंत्री कार्यकर्ताओं को यथा उचित आश्वासन दे रहे हैं लेकिन जिस गति से प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ताओं की आवक और उनकी संख्या बढ़ती जा रही है उससे यह नजर आने लगा है कि अगला सोमवार प्रदेश कार्यालय के लिए कठिन होने वाला है। क्योंकि पहला हफ्ता तो कार्यकर्ताओं तक जानकारी पहुंचने में ही लग गया और फिर कुछ कार्यकर्ताओं को यह भी संदेह था कि क्या पता अगले दिन मंत्री जी प्रदेश कार्यालय में बैठेंगे अथवा नहीं लेकिन अब जिस प्रकार से मंत्री प्रदेश कार्यालय में नियमित रुप से बैठ रहे हैं तो दूरस्थ जिलों के कार्यकर्ता भी प्रदेश कार्यालय आने की हिम्मत जुटा रहे हैं। जिस प्रदेश कार्यालय में वीरानी सी छाई रहती थी उसी प्रदेश कार्यालय में अब 11 बजने के बाद एक- एक करके कार्यकर्ता जुटने लगते हैं। मतलब साफ है कि अब कार्यकर्ताओं का एक बड़ा जखीरा प्रदेश कार्यालय आने वाला है। दूसरी तरफ यह भी बात है कि हर कार्यकर्ता अपने काम और अधिकारियों की शिकायत लेकर ही आ रहे हैं और जब उन कार्यकर्ताओं की शिकायत का निराकरण प्रदेश कार्यालय में बैठे मंत्री नहीं कर पाएंगे तो वहीं कार्यकर्ता पार्टी से नाराज भी होंगे। मतलब साफ है कि भाजपा के नेतृत्व द्वारा कार्यकर्ताओं की बेहतरी के लिए उठाया गया कदम कहीं पार्टी के लिए समस्या का सबब न बन जाए जिसको लेकर शायद भाजपा के नेतृत्व ने अभी तक विचार नहीं किया है।
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