एमपी विधानसभा में 39 फीसदी अपराधी विधायक जिसमें 51 भाजपा से फिर कैसे राजनीतिक सुचिता की बात होगी
चुनाव जीतने के लिए राजनीतिक पार्टियां अपराधियों को चुनाव मैदान में उतारने से कोई परहेज नहीं करती हैं और फिर उनसे अनुशासन की उम्मीद करती हैं। साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कुल विजेताओं में से 39 प्रतिशत अपराधी तो 15 प्रतिशत पर गंभीर अपराध दर्ज हैं। भाजपा के 51, कांग्रेस के 38 विधायकों के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज हैं। ऐसे अपराधिक प्रवित्ति के लोगों को चुनाव में उतार कर जन प्रतिनिधि बनाया जा रहा है और फिर उनसे सुचिता की राजनीति की उम्मीद की जा रही है। उन्हीं जन प्रतिनिधियों में एक है प्रीतम लोधी जिसके खिलाफ अलग-अलग धाराओं और मामलों में कुल 37 प्रकरण दर्ज हैं उसके बाद भी भारतीय जनता पार्टी ने उसको टिकट दिया और आज वो विधायक बन कर भाजपा के गले की फांस बना हुआ है। सत्ता हाथ में रखने के लिए अब भाजपा में किसी प्रकार का परहेज नहीं होता है। किसी जमाने में अटल-आडवाड़ी की पार्टी कहलाने वाली भाजपा में अपराधियों से परहेज किया जाता था लेकिन आज सिर्फ और सिर्फ भाजपा के लिए जीत ही मायने रखती है। अपराधी प्रवित्ति के नेताओं के आंकड़े बताने के लिए काफी हैं कि अब चुनाव जनता के विकास के लिए नहीं बल्कि तथाकथित राजनीतिक समाज सेवकों के लिए लड़े जाते हैं जिससे सत्ता अपने हाथ में रहे और वो अपनी मर्जी के हिसाब से प्रदेश को चलाएं। अगर चुनाव जनता के लिए लड़े जाते तो आपराधिक प्रवित्ति के लोगों से दूरी बनाई जाती लेकिन ऐसा नहीं है। जिन नेताओं के पास पैसा है वो किसी न किसी अपराध में लिप्त हैं। जिनके पास पैसा नहीं है वो सिर्फ टाट और दरी बिछाने का ही काम करते हैं। ऐसी स्थिति में नेताओं द्वारा राजनीतिक सुचिता की बात करना केवल बेमानी है उससे ज्यादा कुछ नहीं।
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