होंगे आप 'सीएम' लेकिन जिले के 'राजा' तो हम हैं प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी दे रही सरकार को मौन चुनौती
मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन के स्पष्ट निर्देशों का कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों ने मखौल बना कर रख दिया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा था कि वो गांवों में रुकें और ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर निराकरण करें, लेकिन ब्यूरोक्रेसी की इस सुस्ती ने जनसंवाद की पहल को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। गांव में कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने और विकास की गति को बढ़ाने के लिए सीएम यादव ने कलेक्टर-एसपी से कहा था कि वो गांवों में जाएं रात्रि विश्राम करें और चौपाल लगा कर जनता से सीधे संवाद करें लेकिन सीएम की बात को 90 फीसदी कलेक्टरों ने अनसुना कर दिया। Mukhbir को मिली सूचना के अनुसार जनता से दूरी बनाने वाले अधिकारियों पर गाज गिरना तय है, जैसा हाल ही में सीधी के तत्कालीन कलेक्टर के साथ हुआ था। कुछ अधिकारी जो गांवों का दौरा कर भी रहे हैं, उनका ध्यान जनसमस्याओं के बजाय केवल फोटो और वीडियो बनवाने तक सीमित है। जिला पंचायत और जनपद सीईओ भी फील्ड में जाने से कतरा रहे हैं। जहां एक ओर कुछ कलेक्टरों ने सीएम के निर्देश को डस्टबिन में डाल कर ऐसी कमरों में बैठना उचित समझा है तो वहीं कुछ कलेक्टर ने सीएम के निर्देश का पालन कर एक नजीर पेस करने का काम किया है। लेकिन ऐसे अधिकारियों की संख्या बेहद कम है जिन्होने सीएम के निर्देश का पालन किया है। इससे यह भी स्पष्ट समझ आता है कि ब्यूरोक्रेसी सरकार के फैसलों का कितना सम्मान करती है। प्रदेश सरकार की मंशा स्पष्ट है कि सरकार की योजना अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे इसी लिए जमीनी हकीकत को समझने के लिए सीधे कलेक्टरों को गांव में रात्रि विश्राम और चौपाल लगाने के लिए कहा गया लेकिन कलेक्टरों ने भी यह बता दिया कि होंगे आप सीएम लेकिन हम भी जिले के राजा हैं।
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