भाजपा के एक ऐसे सह-मीडिया प्रभारी जिन्हें पता नहीं कौन 'सह' दे रहा है जो खुद का मीडिया विभाग चलाते हैं
बदलते समय के साथ मध्य प्रदेश भाजपा में इतना बदलाव आया है कि अब उसके पदाधिकारी कांग्रेस की तर्ज पर खुद की मर्जी से अभियान चलाने लगे हैं। भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी घोषित होने से पहले ही भाजपा ने एक सह मीडिया प्रभारी की घोषणा कर दी थी। उस नियुक्ति के बाद उन सह मीडिया प्रभारी का राजनीतिक रुतवा इतना बढ़ गया कि उनके विभाग के लोग ही अब इस बात की चर्चा करने लगे हैं कि आखिर साहब को सह कौन दे रहा है। पिछले कुछ दिनों से भाजपा कार्यालय के बाहर कांग्रेस नेताओं के होर्डिंग और बैनर लगाएं जा रहे हैं। पहले जीतू पटवारी को मंचमुहा सांप बताया गया फिर दिग्विजय सिंह की होर्डिंग लगाई गई और गुरुवार को कांग्रेस के घोटालों की होर्डिंग लगा दी गई। इस पूरे खेल में मजे की बात यह है कि सह- मीडिया प्रभारी के कारनामों की जानकारी उनके प्रभारी तक को नहीं है। हद तो तब हो गई जब एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने उन सह- मीडिया प्रभारी के होर्डिंग पर प्रवक्ता महोदय से बाइट लेनी चाही तो उन वरिष्ठ प्रवक्ता को ही नहीं मालूम था कि वो सह-मीडिया प्रभारी हैं। दरअसल यहां पर दोष उन वरिष्ठ प्रवक्ता का नहीं है क्योंकि रोजाना सुबह जब बीजेपी मीडिया विभाग की वीडियो कान्फ्रेंसिंग होती है तो सभी प्रवक्ता और पैनलिस्ट उस वीडियो कान्फ्रेंसिंग में जुड़ते हैं लेकिन वो सह-मीडिया प्रभारी वीडियो कान्फ्रेंसिंग में कभी नहीं जुड़ते। यहां तक कि वो प्रदेश कार्यालय आते हैं तो वो सिर्फ वरिष्ठ नेताओं से मिलने आते हैं और अपना स्वागत सत्कार कराकर कार्यालय के बाहर निकल जाते हैं। वो सह- मीडिया प्रभारी कभी भी बीजेपी मीडिया विभाग की तरफ झांकने की जहमत तक नहीं उठाते हैं। कहा ये भी जा रहा है कि वो सह-मीडिया प्रभारी भविष्य के होने वाले मीडिया प्रभारी हैं लिहाजा अभी वो ट्रेनिंग पीरियड में हैं।खैर भाजपा में अब एक ऐसा सह मीडिया प्रभारी बनाने की परंपरा हो चुकी है जो सह-तो होता है लेकिन मीडिया से उसका सिर्फ विवाद और विवाद का ही साथ होता है। पूर्व अध्यक्ष वीडी शर्मा के समय भी एक ऐसे ही सह-मीडिया प्रभारी हुआ करते थे। अच्छी बात है जब पुरानी परंपराएं टूटेंगी नहीं तो नई परंपराओं का जन्म कहां से होगा।
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