पांच साल बाद एमपी बीजेपी के अध्यक्ष बदले वीडी शर्मा की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए हेमंत खंडेलवाल को मिली अध्यक्ष पद की कमान

Dec 31, 2025 - 09:23
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पांच साल बाद एमपी बीजेपी के अध्यक्ष बदले वीडी शर्मा की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए हेमंत खंडेलवाल को मिली अध्यक्ष पद की कमान

साल 2025 में एमपी बीजेपी के  संगठन के नए अध्याय का आगाज आगाज हुआ। पूर्व अध्यक्ष वीडी शर्मा पांच साल चार महीने तक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। एक युवा प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर जब वीडी शर्मा अध्यक्ष बने थे तो प्रदेश में 15 साल बाद कांग्रेस की सरकार स्थापित हो चुकी थी लेकिन उनके आते ही प्रदेश में तख्तापलट हुआ। पहले उपचुनाव,फिर नगरीय निकाय चुनाव हुए उसके बाद विधानसभा का चुनाव हुआ और फिर लोकसभा का चुनाव हुआ सभी चुनाव में भाजपा ने एकतरफा जीत दर्ज की इसी लिए वीडी शर्मा शुभंकर प्रदेश अध्यक्ष कहलाए। वीडी शर्मा के नेतृत्व में भाजपा ने जो भी चुनाव लड़ा सभी में जीत हासिल हुई। एक सामान्य किसान परिवार से आने वाले वीडी शर्मा ने एक ऐसी लकीर तैयार की जिसके बाद भाजपा के नेतृत्व को नया अध्यक्ष चुनने में काफी वक्त लगा आखिरकार हेमंत खंडेलवाल जैसे सांत चित्त और सुलझे नेता पर भाजपा नेताओं ने सहमति बना कर प्रदेश अध्यक्ष के रुप में चुना गया। यहीं से भाजपा संगठन के नए अध्याय का आगाज हुआ। शुरुआती एक महीने तक हेमंत खंडेलवाल ने कार्यकर्ताओं को पहचानने में और संगठन का काम समझने में समय लिया उसके बाद उन्होंने सबसे कम समय में अपनी कार्यकारिणी घोषित कर यह बता दिया कि अब समय टेस्ट का नहीं T20 का आ चुका है। हेमंत खंडेलवाल ने कार्यकर्ताओं को खुश करने के लिए बड़ा नवाचार करते हुए प्रदेश कार्यालय में हफ्ते में पांच दिन मंत्रियों को बैठने के लिए अनिवार्य कर दिया। कार्यालय में सहयोग सेल के नाम से कार्यक्रम शुरु हो गया। अब कार्यकर्ताओं को मंत्रियों के निवास में चक्कर लगाने की जरुरत नहीं पड़ती बल्कि उन्हें आसानी से मंत्री प्रदेश कार्यालय में ही उपलब्ध हो जाते हैं। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष शांत स्वभाव के व्यक्ति हैं। चेहरे पर मुस्कान लिए वो जैसे ही कार्यालय में दाखिल होते हैं तो एक-एक कार्यकर्ता से मुलाकात करते हैं और उनकी बात सुनते हैं। समय के साथ वर्तमान अध्यक्ष पर यह दबाव रहना लाजिमी है कि जिस लाइन को पूर्व अध्यक्ष वीडी शर्मा ने खींचा था उसको मिटाने के बजाय उससे बड़ी लाइन खींच कर भाजपा के सफल अध्यक्षों में अपना नाम शामिल करना होगा क्योंकि आने वाले समय में साल 2027 में नगरीय निकाय फिर 28 में विधानसभा के चुनाव होने हैं। मतलब साफ है कि पार्टी जिस जीत की पटरी पर सवार है उसे लगातार आगे बढ़ाने की चुनौती अब वर्तमान अध्यक्ष के आगे रहेगी।

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