'शीर्षासन' करती प्रदेश की सरकार अब विपक्ष के 'शीर्षासन' की बारी दो दिन कुकरू में बना प्लान मेडिटेशन से मिली शक्ति
भोपाल के रविन्द्र भवन में आयोजित मीसाबंदी कार्यक्रम में सीएम के पास अज्ञात फोन आना और फिर अचानक बैतूल के कुकरु हिल स्टेशन पर जाना मेडिटेशन का सहारा लेना कुछ अलग ही कहानी को जन्म देता नजर आ रहा है। जिस प्रकार से सीएम मोहन यादव ने अचानक कुकरु की तरफ रुख किया ये किसी के गले नहीं उतर रहा है। सीएम ने इस दो दिवसीय दौरे पर स्थानीय कार्यकर्ताओं से संवाद किया,जमीन पर बैठ कर चौपाल लगाई और फिर कार्यकर्ता के घर जाकर जमीन पर बैठ कर भोजन करना यह सब सामान्य नहीं है। जिस वक्त कांग्रेस पार्टी सीएम पर लगातार हमले कर रही है उस वक्त सीएम का राजधानी छोड़ कर कुकरु जाना अलग-अलग कार्यक्रमों में भाग लेना राजनीतिक विश्लेषकों के गले नहीं उतर रहा है। बैतूल से आ रही सीएम की बेजुबान तस्वीरों के भी इस वक्त जुवान लग गई है। एक तस्वीर में सीएम शीर्षासन करते नजर आ रहे हैं,सूर्य नमस्कार कर रहे हैं। यह शीर्षासन यह बता रहा है कि प्रदेश की राजनीति भी शीर्षासन कर रही है। प्रदेश के मुखिया पर जिस प्रकार से जमीन खरीदी के आरोप लगे वो आरोप अब भी बरकरार हैं। सीएम का कुकरु जाना और दो दिन बिताने के मतलब है कि वो विपक्ष को भ्रम में पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। एक ऐसा भ्रम कि जिसे विपक्ष के आरोपों से सीएम को कोई फर्क नहीं पड़ता है। यह तयं है कि विपक्ष ने जिस प्रकार से सीएम पर आरोप लगाए हैं उसका अब सत्ता पक्ष सार्थक जवाब देगा। विपक्ष के पास अपने आरोपों को सिद्ध करने के लिए अब तक कोई ठोस प्रमाण नहीं है। यानि सीएम पर जो आरोप लगाए गए हैं वो अब तक सिर्फ जुवानी आरोप हैं लिहाजा यह दो दिवसीय मेडिटेशन,योग,ध्यान दिमांग को शांत रखने और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को करारा जवाब देने का दौरा था। अब उस वक्त का इंतजार है जब विपक्ष सीएम के सामने शीर्षासन करता नजर आएगा। क्योंकि विपक्ष ने अपनी तरफ से सीएम की छवि खराब करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी तो अब सत्ता पक्ष उसका जवाब जरुर देगा। बस इंतजार है तो उस पल का और उस प्लान का जो कुकरु में सीएम ने तैयार किया है। आखिर जब सीएम अपने प्लान को धरातल में उतारेंगे तो उसकी मारक क्षमता कैसी होगी यह देखना दिलचष्प होगा।
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