अमरीन-आफरीन ने भोपाल की पुलिस कमिश्नर प्रणाली पर उठाया सवाल ओबीसी वर्ग को मतांतरण के लिए किया गया टारगेट
प्रदेश की भाजपा सरकार हर हाथ को काम हर व्यक्ति को रोजगार देने का दावा तो कर रही है लेकिन उसकी हकीकत मतांतरण के रूप में सामने आ रही है। जब बेरोजगारी की मार झेल रही युवतियां ऐसे लोगों के झांसे में आ रही हैं जो बड़ी ही होशियारी से युवतियों को रोजगार के नाम पर अपने झांसे में लेते हैं और फिर उनसे धर्म बदलने का काम भी करवा रहे हैं। ऐसा ही मामला भोपाल के बागसेवनिया क्षेत्र में देखने को मिला जहां पर फिल्म ’द केरल स्टोरी’ की पटकथा रिपीट होती नजर आई है। आरोप है कि अमरीन और आफरीन जैसी महिलाओं ने पहले सहेली बनकर हिंदू युवतियों का भरोसा जीता, उन्हें आर्थिक मदद का लालच दिया और फिर अपने ही भाइयों और प्रेमियों के हाथों उनका शारीरिक शोषण करवाया। Mukhbir को मिली जानकारी के अनुसार यह गिरोह मुख्य रूप से उन महिलाओं को निशाना बनाता था जो आर्थिक रूप से कमजोर या पारिवारिक समस्याओं से जूझ रही थीं। इसके बाद आशिमा मॉल और स्पा सेंटरों के जरिए युवतियों से संपर्क बढ़ाकर उनका भरोसा जीततीं और उन्हें अपने जाल में फंसा लेती थीं। इसके बाद चाय या ठंडे पेय में नशीला पदार्थ मिलाकर बेसुध कर गिरोह के पुरुषों द्वारा बलात्कार करातीं और धर्मांतरण का दबाव डालती थीं। पीड़िताओं को बुर्का पहनने, नमाज पढ़ने और कुरान पढ़ने के लिए मजबूर किया जाता था। पीड़िताओं को केवल भोपाल तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि अहमदाबाद (गुजरात) और मुंबई तक ’सप्लाई’ करने के प्रमाण मिले हैं। इस तरह के मामले उस वक्त देखने को मिल रहे हैं जब भोपाल में कानून व्यवस्था मजबूत करने के लिए सरकार ने कमिश्नर प्रणाली लागू की है। बागसेवनिया में आए मामले में एक 30 वर्षीय तलाकशुदा महिला, जो केटरिंग का काम कर अपना घर चला रही थी, उसे अमरीन ने 10 हजार रुपये की बेबीसिटर की नौकरी का झांसा दिया। अमरीन के प्रेमी चंदन यादव (जिसका खुद अमरीन ने धर्मांतरण कराकर मुस्लिम बना लिया था) ने महिला के साथ दुष्कर्म किया। बाद में उसे अहमदाबाद ले जाकर अमरीन के भाई यासिर को सौंप दिया गया। छत्तीसगढ़ की एक ब्यूटीशियन को उसकी सहेली संजना (जो खुद हिंदू से 'जन्नत' बन चुकी थी) ने फंसाया। संजना ने पीड़िता को भरोसा दिलाया कि मुस्लिम लड़के अच्छे होते हैं, मारते-पीटते नहीं हैं। इसके बाद चंदन, बिलाल और यासिर ने मिलकर महीनों तक पीड़िता का शोषण किया और उसे छोटे कपड़े पहनकर पार्टियों में जाने को मजबूर किया। मामले सामने आने के बाद पुलिस जांच पड़ताल कर रही है लेकिन अभी तक मछली कांड का भी भोपाल पुलिस खुलासा नहीं कर पाई है। ऐसी स्थिति को देखते हुए अब बजरंग दल जैसे सामाजिक संगठनों को सड़क में उतरना पड़ रहा है।
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