'जंग लगी तलवारों' को भाजपा दे रही धार 'योग्यता' नहीं रहा पैमाना मौन रहने वाले नेता सरकार और संगठन की बन रहे पहली पसंद
लगातार सफलता के घोड़े पर सवार भारतीय जनता पार्टी की रीति-नीति पर बड़ा बदलाव नजर आने लगा है। भाजपा में अब नीति नहीं नियति पर बात होती है। जीत का ऐसा चस्का लगा है जिसके आगे योग्यता कोई पैमाना ही नहीं रहा। साल 2023 में जब मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार का गठन हुआ तो अप्रत्याशित चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया जिनकी कोई भी कल्पना नहीं कर रहा था। ऐसे चेहरों को सरकार में शामिल किया गया जो खाली स्थान भरने के लिए काफी थे। बांकी वो सवाल और जवाब करने वाले नहीं थे। सीएम साहब जो भी कहें वहीं सही है। जो नेता बोलने वाले थे जिसमें कैलाश विजयवर्गीय,प्रहलाद पटेल और राकेश सिंह जैसे नेता ये सभी पद होते हुए भी हासिल पर चले गए। ठीक उसी प्रकार संगठन में भी ऐसे पदाधिकारियों को मौका दिया गया जिन्होंने सिर्फ खाली स्थान भरने का काम किया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में बनी नई कार्यकारिणी में ऐसे लोगों को ही मौका मिला है जो पद लेकर और अपने वाहन में पद नाम लिखवा कर ही खुश हैं। इसके बाद जब अप्रत्याशित निगम-मंडलों की घोषणा हुई तो भाजपा ने एक-एक करके अपने पुर्जे खोल कर रख दिए। ऐसे-ऐसे दागी और बागी नेताओं को खोज-खोज कर निगम-मंडलों में शामिल किया गया जो कहीं से भी अपेक्षित नहीं थे लेकिन भाजपा ने उन्हें पंजीरी की तरह पद बांट कर खानापूर्ति कर दी। कुल मिला कर भाजपा एक ऐसे रास्ते पर निकल पड़ी है जहां पर योग्यता के पैमाने को पूरी तरह ध्वस्त कर सिर्फ जाति,संप्रदाय इन्हीं के पैमाने पर तौला जा रहा है। भाजपा सिर्फ ऐसे नेताओं को खोज-खोज कर निकाल रही है जो जंग खाई तलवार की तरह कहीं कोने में पड़े थे जिस तलवार में कितनी भी धार लगा लो वो जंग के काम नहीं आने वाली ठीक उसी प्रकार के नेताओं को खोज कर भाजपा पदों की भरपाई कर रही है। लेकिन इसके दुष्परिणामों की तरफ शायद भाजपा का ध्यान नहीं जा रहा है। क्योंकि योग्यता कोई वस्तु नहीं जिसे दबाया या छुपाया जा सके। योग्यता मेहनत और लगन से हासिल की जाती है। जिन योग्य नेताओं को साइड करके भाजपा अयोग्यों को आगे लाने का काम कर रही है वही योग्य नेता जिस दिन अपनी ताकत का इस्तेमाल करने पाए उस दिन भाजपा की हालत कांग्रेस जैसी हो जाएगी। एक दौर में अत्यधिक सफलता के घोड़े पर कांग्रेस भी सवार थी। कांग्रेस में भी योग्यता को पीछे कर अयोग्यता को स्थान दिया गया था। नतीजा सबके सामने है। आज 20 साल से विपक्ष में बैठी कांग्रेस अपनी उसी गलती पर पछता रही है। लिहाजा भाजपा के पास अब भी समय है। वक्त बदलते देर नहीं लगती। कहते हैं भाजपा अपनी गलतियों से सीखने वाली पार्टी है लेकिन लगातार जीत के कारण भाजपा को अपनी गलतियों का अहसास नहीं हो रहा हो जो एक दिन जरुर होगा।
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