भाजपा की गुटबाजी ने निगम-मंडलों की नियुक्ति पर लगाया ब्रेक दिल्ली से हस्तक्षेप का किया गया अनुरोध

Feb 20, 2026 - 10:51
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भाजपा की गुटबाजी ने निगम-मंडलों की नियुक्ति पर लगाया ब्रेक दिल्ली से हस्तक्षेप का किया गया अनुरोध

चुनाव जीतने के चक्कर में भारतीय जनता पार्टी ने बेतहाशा भर्तियां की लेकिन अब उसके साइड इफेक्ट देखने को मिलने लगे हैं। 2023 में विधानसभा चुनाव हुए और अब तीसरे साल में मोहन सरकार प्रवेश कर चुकी है लेकिन निगम-मंडलों की घोषणा अभी तक नहीं हुई है। जिसका कारण भाजपा के अंदर नेताओं के बीच चल रही वर्चस्व की लड़ाई है। पिछले तीन महीने में सरकार और संगठन की तरफ से की बार निगम-मंडल की सूची तैयार की गई लेकिन हर बार पार्टी के नेता किसी न किसी नाम को लेकर अपनी टांग अड़ा देते और ऐसा करते-करते प्रदेश संगठन भी तंग आ गया। थक हार कर प्रदेश नेतृत्व की तरफ से मोर्चों की तरफ ध्यान दिया जाने लगा और अब एक-एक करके मोर्चों की कार्यकारिणी घोषित करने की प्रक्रिया शुरु कर दी गई है। गुरुवार की शाम भाजपा अजजा मोर्चे की कार्यकारिणी जारी की गई है और उम्मीद है कि हफ्ते भर के अंदर भाजपा अपने सातों मोर्चों की कार्यकारिणी जारी कर देगी। गुरुवार को भाजपा के प्रदेश कार्यालय में प्रशिक्षण महाअभियान का भी आयोजन किया गया था। इसी दौरान प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बयान देकर निगम-मंडलों के दावेदारों के दिलों की धड़कनों को तेज कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि पार्टी में मोर्चा,प्रकोष्ठ और निगम-मंगलों की नियुक्ति पर तेजी से काम चल रहा है और जल्द ही सारी नियुक्तियां कर दी जाएंगी। Mukhbir को मिली सूचना के अनुसार संगठन की नियुक्तियों में दिक्कत नहीं हो रही हैं सारी दिक्कतें निगम-मंडल की नियुक्तियों को लेकर ही हैं। क्योंकि नेता बिना चुनाव जीते मंत्री पद का दर्जा चाहते हैं लिहाजा वो भोपाल से लेकर दिल्ली तक एड़ी चोटी का बल लगा रहे हैं कि किसी भी तरह से उनका नाम निगम-मंडलों में शामिल हो जाए। सरकार की तरफ से सभी क्षेत्रों से एक-एक मंत्री को निगम-मंडल की नियुक्ति के लिए कोआर्डीनेटर भी बनाया गया है। और वहीं को आर्डिनेटर हारे झगड़े की फसाद बन रहे हैं। खबर तो यह भी है कि कुछ मंत्री सीधे सीएम के फैसलों का भी विरोध कर रहे हैं। मालवा अंचल का विरोध अब भाजपा के लिए भारी पड़ने लगा है। मालवा अंचल में दो बड़े नेताओं के बीच गृह युद्ध चल रहा है। ठीक उसी प्रकार विंध्य क्षेत्र से भी वरिष्ठ नेता और सीएम के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। ग्वालियर-चंबल में भी नेताओं के बीच सहमति नहीं बन रही,महाकौशल क्षेत्र से भी नियुक्तियों में टांग अड़ाई जा रही है। यही कारण है कि अब निगम-मंडलों की नियुक्ति मामले में राष्ट्रीय नेतृत्व से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया है। सीएम मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दिल्ली में समय मांगा है और अब वहीं से निगम-मंडल की सूची को फायनल कर जारी किया जाएगा।

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