भाजपा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कार्यकर्ताओं को बनाएगी 'इंटेलीजेंट' त्रिदेव फिर दिखाएंगे अपना कमाल
भाजपा के जीत की चाभी उसके बूथ स्तर तक फैले त्रिदेव कहलाते हैं। और उन्हीं के बल पर भारतीय जनता पार्टी चुनाव जीतने के दावे भी करती है। लिहाजा अब साल 2017 से चुनावी वर्ष शुरु होने जा रहे हैं उसके पहले भाजपा अपने त्रिदेवों को एक बार फिर सक्रिय करने के मूड में आ चुकी है। और अब भाजपा अपने त्रिदेवों को नई तकनीक से लैस कर आगे चुनावी तैयारी में उतारने की फिराक में है। इसी लिए भोपाल के रवीन्द्र भवन में बीजेपी के दीनदयाल प्रशिक्षण महा अभियान के तहत कार्यकर्ताओं की ट्रेनिंग होगी। इस ट्रेनिंग की विशेषता यह है कि अब आरएसएस के तीन प्रांतों की संरचना के अनुसार भोपाल में मध्य भारत प्रांत के जिलों से करीब 600 वक्ताओं को प्रशिक्षण में शामिल किया जाएगा। वो सभी प्रतिभागी मंडल स्तर पर दिए जाने वाले प्रशिक्षण के लिए मास्टर ट्रेनर होंगे। प्रशिक्षण में सीएम डॉ. मोहन यादव, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल, प्रदेश प्रभारी डॉ महेन्द्र सिंह मुख्य रूप से शामिल होंगे। बीजेपी का यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तर्ज पर तीन प्रांतों महाकौशल, मध्यभारत और मालवा के मुख्यालयों पर होगा। प्रशिक्षण का एक मुख्य उद्देश्य कार्यकर्ताओं को आधुनिक तकनीक के उपयोग के अनुरूप ढालना है। पार्टी का मानना है कि 'व्यक्ति निर्माण से संगठन निर्माण' और फिर 'राष्ट्र निर्माण' के लक्ष्य को पाने के लिए कार्यकर्ताओं का तकनीकी रूप से दक्ष होना अनिवार्य है। मंडल स्तर पर आयोजित होने वाले 24 घंटे के गहन प्रशिक्षण सत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सोशल मीडिया, नमो ऐप और संगठन ऐप पर विशेष सत्र रखे गए हैं। इसके माध्यम से कार्यकर्ताओं को सिखाया जाएगा कि कैसे तकनीक का उपयोग कर पार्टी की विचारधारा और सरकार की उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाया जाए। महाअभियान के संचालन के लिए एक 'राष्ट्रीय टोली' बनाई गई है, जिसमें मध्य प्रदेश से भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व सांसद वी.डी. शर्मा को सह-संयोजक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा, राष्ट्रीय टोली में सदस्य के रूप में कविता पाटीदार को भी शामिल किया गया है. क्षेत्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए के.सी. पटेल को प्रभारी नियुक्त किया गया है।मंडल स्तर पर कुल 7 सत्र आयोजित होंगे, जिनमें वैचारिक अधिष्ठान और इतिहास के साथ-साथ तकनीकी कौशल पर विशेष जोर रहेगा।
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