'जाति का तड़का' लगा कर भाजपा का नया फॉर्मूला कुशवाह को आगे करो अजा-ओबीसी का वोट साधो 18 साल बाद याद आई 'सामाजिक समीकरण' की रेसिपी
दतिया में चुनावी बिगुल बजते ही भाजपा को अचानक "सामाजिक न्याय" याद आ गया है। और इस बार रेसिपी बहुत सिंपल है - "दतिया में कुशवाह को आगे करो, अजा-ओबीसी का वोट पक्का करो"। मुखबिरों के मुताबिक भाजपा ने दतिया में पूरी ताकत झोंक दी है। वजह? यहां की राजनीति पर सालों से "एक ही परिवार" का कब्जा रहा है। अब जब वो नाराज हैं, तो पार्टी को नया चेहरा चाहिए था। मिल गया - कुशवाह समाज का चेहरा।
"वर्ग" नहीं "वर्गीकरण" की राजनीति
भाजपा का प्लान क्लियर है। कुशवाह को आगे करके अजा और ओबीसी वोट साधने हैं। साथ में जाटव और अन्य समाज को भी "अपनापन" दिखाना है।
मतलब सीधा है - विकास की बात बाद में, पहले जाति का हिसाब खबर ये भी है कि भाजपा ने दतिया में "पहली बार" और "अंतिम बार" वाली रणनीति अपनाई है। जीत गए तो ठीक, हार गए तो प्रयोग था।
कांग्रेस बोली - "कॉपी-पेस्ट मत करो"
उधर कांग्रेस ने भी कमर कस ली है। उनका कहना है कि भाजपा को अब जाकर याद आया कि जमीन पर भी लोग रहते हैं। "18 साल तक सिर्फ सर्वे और सोशल मीडिया से काम चलाया, अब चुनाव आया तो जातिगत जनगणना याद आ गई" - ये तंज कांग्रेस की तरफ से है।
सवाल जनता का
दतिया की जनता अब पूछ रही है -
"टिकट जाति देखकर दोगे, काम भी जाति देखकर करोगे क्या?"
और
"पहले जो 3 बार विधायक रहे, वो किस समाज के थे? और अब अचानक सामाजिक समीकरण क्यों?"
खैर, राजनीति है। यहां समीकरण बदलते देर नहीं लगती। बस वोटर अपना हिसाब 3 अगस्त को कर देगा।
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