कमल के 'तालाब' में जमी काई को साफ करने की चल रही कवायद
मप्र भाजपा में अनेकों नवाचार के बाद भी कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को नहीं मिल रहा और उसका असर अब न सिर्फ एसआइआर में देखने को मिला है बल्कि सीएम यादव के दो वर्षों की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के मामले में भी पार्टी के कार्यकर्ता दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। और पार्टी में इस बात को लेकर अब चर्चा शुरु हो गई है। मतलब साफ है कि कमल के तालाब में अदृश्य रुप से 'काई' जम गई है जिसे प्रदेश नेतृत्व साफ करने में जुट गया है। दरअसल विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस से पलायन कर लाखों कार्यकर्ता भाजपा में आए। सदस्यता अभियान के दौरान वो सभी कार्यकर्ता अपने हिस्से के 100-100 मिस काल करा कर सक्रिय कार्यकर्ता बन गए लेकिन उनकी कार्यप्रणाली में कोई बदलाव नहीं आया है। वहीं 'राजसी ठाठ' जो कांग्रेस में हुआ करता था। क्योंकि कांग्रेस में सभी को हर मामले में आजादी रहती है। लिहाजा दल भले बदल गया लेकिन उनके विचार आज तक नहीं बदले। यही कारण है कि भाजपा के जो पुराने और मूल कार्यकर्ता हैं तो उनके और कांग्रेस से आए कार्यकर्ताओं के बीच बड़ा अंतर पैदा कर रहा है। कांग्रेस से भाजपा में आए कार्यकर्ता एसआइआर में रुचि नहीं ले रहे हैं तो भाजपा के कार्यकर्ता भी रुचि नहीं ले रहे हैं। उनका मानना है कि जब पद की बारी आती है तो संगठन में सिफारिश ही काम आती है फिर मेहनत करके क्या लाभ। मतलब साफ है कि कमल के तालाब में एक ऐसी 'काई' जमी है जिसे अब प्रदेश नेतृत्व साफ करने में जुट गया है। शुक्रवार को प्रदेश कार्यालय में हुई सत्ता और संगठन की बैठक में इन्हीं बातों पर फोकस किया गया है। सभी पदाधिकारियों से सरकार की दो साल की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए कहा गया है साथ ही एसआइआर के कामों में जुटने के लिए भी कहा गया है।
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