दो साल में नहीं है सरकार के पास बताने को 'उपलब्धियां' दो उपलब्धि बताई एक अमित शाह दूसरी शिवराज की
मप्र के मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव सरकार की सफलता के दो साल मना रहे हैं। सरकार की सफलता बताने के लिए पार्टी के सभी मोर्चों को सक्रिय भी कर दिया गया है। मजे की बात ये है कि सरकार की उपलब्धियां बताने के लिए सीएम मोहन यादव ने प्रेसवार्ता बुलाई जिसमें सीएम ने करीब एक घंटे तक संबोधन दिया। एक घंटे के प्रजेंटेशन में सीएम ने दो मुद्दों का जिक्र किया जिसमें पहला मुद्दा नक्सलियों के खात्मे का। मजे की बात यह है कि यह अभियान केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह का है जिसे सभी नक्सल प्रभावित राज्यों में चलाया जा रहा है। दूसरा मुद्दा जिस पर सीएम ने बात की वो था उज्जैन में क्षिप्र के स्वच्छ जल का। इस अभियान को पूर्व सीएम शिवराज ने ही पूरा किया था। इसके अलावा रीजनल इन्वेस्टर मीट की सीएम ने बात की। सरकार की पहल अच्छी थी लेकिन धरातल पर उसका असर कम ही देखने को मिला है। 800 से अधिक कंपनियों की बात हुई थी लेकिन अब तक 200 से भी कम भूमिपूजन हुए हैं। सरकार ने एक लाख बेरोजगारों को शासकीय स्तर पर नौकरी देने के लिए कहा था जिसमें सिर्फ सात हजार 500 पर काम चल रहा जो पुलिस विभाग में की जा रही है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार निजी सेक्टरों की तरफ जा रही है। इस प्रकार से सरकार की उपलब्धियां हैं। प्रेस वार्ता के आखिरी में कुछ चुनिंदा मीडिया को सवाल पूछने का मौका दिया गया। पर्ची उठाते समय सीपीआर दीपक सक्सेना ने कहा कि वरीयता के हिसाब से नाम नहीं बोला जा रहा है। जिसकी जैसी पर्चियां आई है वैसे ही नाम बोले जा रहे हैं। लेकिन जब पर्चियों से नाम बोलने का सिलसिला शुरु हुआ तो सभी एडीटरों के ही नाम सामने आए। और ऐसे एडीटरों के नाम पुकारे गए जिनको सवाल नहीं करना था बल्कि सरकार की और सीएम की तारीफ करनी थी। एक महिला पत्रकार का नाम जरुर दिया गया लेकिन उनको गंभीरता से नहीं लिया गया। सवाल तो उनका अच्छा था लेकिन उसे इतने हल्के तरीके से ट्रीट किया गया जिससे ये समझ में आया कि यहां सब स्क्रिप्टेड है।
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