ब्राह्मण नेताओं को 'ठिकाने' लगा कर भाजपा ओबीसी हितैषी बनने का कर रही प्रयास
जिस भारतीय जनता पार्टी की नींव ब्राह्मणों ने रखी थी उसी भारतीय जनता पार्टी में आज ब्राह्मणों का अस्तित्व खतरे में है। एक-एक करके भारतीय जनता पार्टी में ब्राह्मण नेताओं को ठिकाने लगाने का प्रयास किया जा रहा है। भाजपा में उन्हीं ब्राह्मण नेताओं को महत्व दिया जा रहा है जो जाति से तो ब्राह्मण हैं लेकिन वो खुद ब्राह्मणों से कोशों दूर हैं। पिछले कई साल से ब्राह्मण भी भाजपा को ही अपना सबसे मजबूत राजनीतिक ठिकाना मान कर चल रहे थे। लेकिन जिस प्रकार से भाजपा में बदलाव की बाहर चली उससे भाजपा सिर्फ ओबीसी वर्ग तक सिमट कर रह गई। आज मोदी सरकार हो अथवा मध्य प्रदेश की मोहन सरकार इन डबल इंजन की सरकारों में सिर्फ ओबीसी वर्ग को ही महत्व दिया जाता है। मध्य प्रदेश में ब्राह्मण नेता कहलाने वाले डाक्टर नरोत्तम मिश्रा,गोपाल भार्गव को साइड लाइन कर दिया गया। इनके अलावा बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को भी साइड लाइन किया गया है। संगठन से लेकर सरकार तक सभी जगहों पर ब्राह्मण वर्ग के चुनिंदा नेताओं को साइड लाइन किया गया है। खास कर भाजपा ने ऐसे ब्राह्मण नेताओं को साइड किया है जो ब्राह्मण वर्ग के बीच लोकप्रिय थे और विप्र वर्ग उनकी बात को मानता था ऐसे नेताओं को साइड कर भाजपा ने सरकार में राजेन्द्र शुक्ल और राकेश शुक्ला जैसे नेताओं को मंत्री बना कर यह बताने का प्रयास किया है कि संख्या के आधार पर ब्राह्मणों को उचित प्रतिनिधित्व दिया गया है। लेकिन हकीकत तो यही है कि सरकार और संगठन में सिर्फ उन्हीं नेताओं को तबज्जो दी जा रही है जो हर वक्त 'जी भाई साहब' कह कर कोई भी आदेश मानने के लिए तैयार रहते हैं। हाल ही में ब्राह्मण वर्ग के खिलाफ जिस प्रकार से प्रदेश भर में माहौल खड़ा किया गया संतोष वर्मा जैसे आइएएस अधिकारियों ने ब्राह्मण बेटियों को अपशब्द कहा दूसरी तरफ मंच से शंकराचार्यों पर टिप्पणी की गई और सरकार सभी जगहों पर मौन धारण करके रही उससे सीधे यह मतलब निकाला जा सकता है कि ब्राह्मणों के खिलाफ चल रहे मामलों में राज्य सरकार और भाजपा के संगठन की मौन स्वीकृति है।
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