भोपाल RTO कार्यालय को शहर से बाहर करके लगता है भ्रष्टाचार का मुफ्त में लाइसेंस बांट दिया
भोपाल का RTO कार्यालय अपनी व्यवस्थाओं और कार्यपद्धति के लिए अक्सर चर्चा में रहा है और अब तो RTO कार्यालय को शहर से बाहर करके लगता है कि अधिकारियों और कर्मचारियों को भ्रष्टाचार करने का मुफ्त में लाइसेंस बांट दिया गया है। राजधानी से बाहर बने इस कार्यालय में जरुरत मंदों के काम हों या न हों लेकिन जिस प्रकार से RTO कार्यालय की सिक्योरिटी को चाक चौबंद किया गया है वो अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। दरअसल आरटीओ कार्यालय में करीब 14-15 सिक्योरिटी गार्डों की तैनाती की गई है। सभी सिक्योरिटी गार्ड निजी एजेंसियों से हायर किए गए हैं जबकि यह एक शासकीय संस्था होती है जहां पर जरुरत पड़ने पर पुलिस के जवान तैनात किए जाने चाहिए। मजे की बात एक और है कि आरटीओ जीतेन्द्र शर्मा के चेंबर के बाहर एक पिस्टल धारी गार्ड तैनात रहता है वो भी निजी एजेंसी के द्वारा ही रखा गया है। कोई आम नागरिक आरटीओ जीतेन्द्र शर्मा से मिलना चाहते तो उनका सिक्योरिटी गार्ड पहले ही कह देता है कि साहब कार्यालय में नहीं हैं। इसके अलावा उसका दूसरा बहाना होता है कि साहब मीटिंग में हैं। लोगों को इतना लंबा इंतजार करवाया जाता है कि आरटीओ साहब से मिले बगैर ही जरुरत मंद लोग लौट जाते हैं। इन सिक्योरिटी गार्डों की फौज देख कर ये सवाल तो बनाते हैं कि निजी एजेंसी से हायर किए गए सुरक्षाकर्मियों के वेतन का कौन भुगतान करता है। परिवहन विभाग से एक फंड जरुर जारी किया जाता है लेकिन वो फंड इतना पर्याप्त नहीं होता कि 14-15 सिक्योरिटी गार्डों को रखा जा सके। इसके अलावा एक और भी बात अहम है कि आरटीओ साहब जीतेन्द्र शर्मा के कार्यालय आने और जाने का कोई समय निर्धारित नहीं है। वो अक्सर तीन बजे के बाद ही कार्यालय आते हैं तब तक कार्यालय की भीड़ छंट चुकी होती है। साहब की गैर मौजूदगी में एक दलाल ही उनके काम को अंजाम देता है। उस दलाल का नाम भी फोटो के साथ सार्वजनिक किया जाएगा जो RTO के स्थान पर खुद ही साइन करके कागजी औपचारिकताओं को पूरा कर देता है। कार्यालय में मौजूद कर्मचारी भी काम से ज्यादा खाने-पीने में व्यस्त रहते हैं। लंच का कोई समय नहीं हैं कर्मचारी कभी भी लंच का समय घोषित कर देते हैं। और जो उपभोक्ता जाता है वो घंटों तक इंतजार करता रहता है। और अब तो गर्मी का समय आ चुका है RTO पहुंचने वाले ग्राहकों के लिए कार्यालय की तरफ से प्याऊ तक की व्यवस्था नहीं है जबकि सुरक्षा कर्मियों को देने के लिए विभाग के पास राशि की कमी नहीं है।
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