बीजेपी की कार्यसमिति और निगम-मंडल की सूची को लेकर समन्वय पर समन्वय बैठकें हुई लेकिन सारी कोशिशें नाकाम

Apr 8, 2026 - 08:28
 0  86
बीजेपी की कार्यसमिति और निगम-मंडल की सूची को लेकर समन्वय पर समन्वय बैठकें हुई  लेकिन सारी कोशिशें नाकाम

मध्य प्रदेश भाजपा में दिखने में तो सबकुछ ठीक लग रहा है लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। जिस भाजपा में कैडर की बात होती थी उसी भाजपा में आए अंतर्कलह का ज्वार भांटा फूट रहा है। पार्टी के अंदर हर नेता खुद को वरिष्ठ मान कर चल रहा है। प्रदेश अध्यक्ष की विनम्रता ही उनके लिए घातक हो रही है। पार्टी और सरकार के अंदर ही अंदर इतना बड़ा विवाद चल रहा है कि संगठनात्मक और राजनीतिक नियुक्तियां ही नहीं हो पा रही हैं। निगम-मंडल की नियुक्तियों को लेकर हफ्ते भर में दो बार सरकार,संगठन और संघ के पदाधिकारियों के बीच बैठक हुई लेकिन उनके नतीजे सार्थक परिणाम में तब्दील नहीं हो पाए और लोग आज भी प्रदेश कार्यसमिति और निगम-मंडल की सूची का इंतजार कर रहे हैं। इतना ही नहीं 17 प्रकोष्ठों में सिर्फ तीन प्रकोष्ठों के संयोजकों की घोषणा भाजपा का नेतृत्व कर पाया उसके बाद प्रकोष्ठों को लेकर भी पार्टी के कुछ नेताओं ने भौंहें तरेरना शुरु कर दिया। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने अपनी तरफ से सभी प्रकार की जोर आजमाइश करने की कोशिश की। सरकार,संगठन और संघ के बीच समन्वय बैठकें की लेकिन नेताओं की नाराजगी को वो दूर नहीं कर पाए। निगम-मंडल की नियुक्तियों को लेकर सरकार और संगठन ऐसे उलझा कि प्रदेश कार्यसमिति का इंतजार बढ़ने लगा। भाजपा की स्थिति ऐसी हो रही है कि आधी छोड़ पूरी को धावै,आधी मिलै न पूरी पावै। प्रदेश अध्यक्ष समन्वय बना कर राजनीतिक नियुक्तियों को निपटाना चाह रहे हैं लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं कि वो अपनी वरिष्ठता का हट त्यागने को तैयार नहीं हैं लिहाजा बड़े नेताओं के ईगो को शांत करते-करते अब प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल खुद शांत मूड में आ चुके हैं। ठीक उसी प्रकार से प्रदेश कार्यसमिति को लेकर भी पार्टी में सिर फुटौव्वल की स्थिति बनी हुई है। हर बड़ा नेता अपने समर्थकों की कार्यसमिति में इंट्री कराकर संगठन से जुड़ा रहना चाहता है। कुल मिला कर कार्यसमिति के नाम पर बड़े नेता संगठन में अपने स्लीपर सेल तैनात करना चाहते हैं जिससे संगठन के अंदर की जानकारी उन्हें समय-समय पर मिलती रहे। फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष लगातार समन्वय पर जोर दे रहे हैं। सरकार,संगठन और संघ के बीच हुई समन्वय बैठकों में भी जब सार्थक परिणाम नहीं निकले तो प्रदेश अध्यक्ष ने नया रास्ता अपना लिया जिसके तहत वो अब बड़े नेताओं से अकेले मिल रहे हैं और मनाने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले तीन दिनों में प्रदेश अध्यक्ष ने कई मंत्रियों से मुलाकात की और समन्वय बनाने पर जोर दिया है। Mukhbir को मिली सूचना के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल द्वारा अपनाया जा रहा नया तरीका सफल होता नजर आ रहा है और अब धीरे-धीरे परिस्थितियां अनुकूल होने की ओर बढ़ रही हैं।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow