विकास तो मोहन सरकार ने किया है लेकिन उसे देखने के लिए दिव्य आंखे चाहिए
प्रदेश की मोहन सरकार ने हाल ही में दो वर्ष का कार्यकाल पूरा किया है। उस कार्यकाल में सरकार ने इतना विकास किया है कि अब बताने के लिए हर मंत्री को प्रेसवार्ता करनी पड़ रही है। रोजाना दो से तीन मंत्रियों की प्रेस वार्ता आयोजित होती है। जिसमें मंत्री अपने विभाग की उपलब्धियां बताते हैं। ये बात और है कि उपलब्धियों में निकलता कुछ नहीं है। कुल मिला कर पूर्व की शिवराज सरकार के कामों को ढकने का प्रयास किया जा रहा है। अब तक करीब डेढ़ दर्जन भर से ज्यादा मंत्री अपने विभागों की उपलब्धियां बता चुके हैं लेकिन उनके पास केन्द्रीय योजनाओं के अलावा बताने के लिए कुछ नहीं है। गोविंद सिंह राजपूत ने केन्द्रीय योजनाओं की जानकारी देकर सरकार से जोड़ा,मंत्री राकेश सिंह ने केन्द्रीय योजनाओं को बताया,ऐसे ही अन्य मंत्री भी केन्द्रीय योजनाओं को मप्र सरकार से जोड़ा कर बताते रहे। प्रदेश की मोहन सरकार ने करोड़ों रुपये ब्रांडिंग में खर्च कर दिए अगर उतने ही रुपये किसी एक योजना को सही तरीके से संचालित करने का प्रयास करते तो शायद कोई योजना पूरी हो पाती। सरकार विकास की बात कर रही है और निजी करण की तरफ लगातार बढ़ रही है। जीडीपी की बात सरकार कर रही है। प्रति व्यक्ति की आय बढ़ने का दावा सरकार कर रही है और आउटसोर्स के माध्यम से महज दस हजार रुपये वेतन देकर कर्मचारियों से काम कराया जा रहा है। नियमित कर्मचारी पान गुटखा खाते घूमते पाए जाते हैं और आउटसोर्स के कर्मचारी नौकरी जाने के भय से कोल्हू के बैल की तरह काम करते रहते हैं। इस प्रकार से राज्य सरकार ने विकास के काम किए हैं।
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