कांग्रेस अध्यक्ष पटवारी सिर्फ 'मुखौटा' जिला अध्यक्षों का 'रिमोट' दिल्ली हाई कमान के पास
मप्र कांग्रेस के संगठन को मजबूत करने के लिए पार्टी में लगातार संगठन सृजन अभियान चलाया गया और उसी के तहत जिला अध्यक्षों की नियुक्ति हुई। मजे की बात ये रही कि संगठन सृजन अभियान में जीतू पटवारी के अलावा सभी वरिष्ठ नेताओं की चली। दरअसल कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे बड़े नेताओं की दिल्ली के हर नेता से अच्छी बॉडिंग है। लिहाजा जब केन्द्रीय नेतृत्व ने संगठन सृजन अभियान के लिए दिल्ली से पर्यवेक्षकों को भेजा तो बड़े नेताओं ने पर्यवेक्षकों से वही नाम दिल्ली भेजवाया जो उनके प्रिय थे। जिला अध्यक्षों की घोषणा होने के बाद सभी जिला अध्यक्षों को अधिकार संपन्न बनाने की बात उठी। जिसके तहत यह नियम बनाया गया कि अब किसी भी चुनाव में जो कैंडीडेट घोषित होगा वो जिला अध्यक्ष की सहमति से ही होगा। मतलब साफ है कि जीतू पटवारी प्रदेश अध्यक्ष के रुप में महज एक मुखौटा बन कर रह गए। कहानी सिर्फ उम्मीदवारों के चयन तक ही सीमित नहीं है। जिला अध्यक्ष अपने जिलों में जो भी पार्टी के नाम पर गतिविधियां संचालित करेंगे वो मेल के माध्यम से सीधे दिल्ली में रिपोर्टिंग करेंगे। सभी जिला अध्यक्षों की निगरानी भी दिल्ली से ही रखी जाएगी। प्रदेश अध्यक्ष के हाथ खाली ही रहेंगे क्योंकि जिला अध्यक्ष सीधे दिल्ली हाई कमान के आदेश पर काम करेंगे। दो नवंबर से पचमढ़ी में कांग्रेस जिला अध्यक्षों का दस दिवसीय प्रशिक्षण शिविर भी शुरु होने वाला है। जिसमें एमपी के अलावा दिल्ली से भी वक्ता आएंगे और वो अध्यक्षों को अलग-अलग सत्र में ये जानकारी देंगे कि आपको कैसे काम करना है और उसकी रिपोर्टिंग दिल्ली में कैसे करना है। संगठन सृजन अभियान में पार्टी ने न सिर्फ अध्यक्ष अपने हिसाब से तैयार किया है बल्कि उनका रिमोट अपने पास रख लिया है जिससे वो दिल्ली के हिसाब से ही चलें।
What's Your Reaction?