कांग्रेस से भाजपा में आए सिद्धार्त तिवारी आज भी 'पंजे' का नहीं छोड़ पाए मोह कांग्रेसियों का देते हैं साथ बीजेपी कार्यकर्ताओं को करते हैं 'इग्नोर'
साल 2023 विधानसभा चुनाव से पहले श्रीनिवास तिवारी के पौत्र सिद्धार्त तिवारी ने ऐन मौके पर हाथ का दामन छोड़ फूल का सहारा लिया और त्योंथर से विधायक बने। श्रीनिवास तिवारी के नाम पर स्थानीय जनता ने उनका जमकर साथ दिया यहां तक कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी पार्टी के उम्मीदवार को जिताने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी लेकिन तब तक भाजपा के कार्यकर्ताओं को इस बात का अहसास नहीं था कि जिसके लिए वो मेहनत कर रहे हैं वो उनके लिए सौतेली अम्मा की संतान हैं। क्योंकि सिद्धार्त कांग्रेस से आए नेता हैं लिहाजा उनका संबंध कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से तीन पीढ़ियों का है। चुनाव जीतते ही सिद्धार्त ने आखिर में अपना रंग दिखाना शुरु कर दिया और प्रत्येक कांग्रेस कार्यकर्ताओं के घर जाना शुरु कर दिया। बात यहां तक भी ठीक थी लेकिन सिद्धार्त तिवारी जिस ब्राह्मण वर्ग से आते हैं उस ब्राह्मण वर्ग सहित पूरे सवर्ण समाज से उन्होंने दूरी बना ली। हरिजन आदिवासियों के आवास तक ही उनके दौरे होते हैं। सामान्य वर्ग का व्यक्ति तो सिद्धार्त तिवारी की लिस्ट में आता ही नहीं है। सिद्धार्त के विधायक बनने के बाद प्रत्येक भाजपा कार्यकर्ता खुद को ठगा सा महसूस करने लगा है। क्योंकि सिद्धार्त धीरे-धीरे ही सही लेकिन अपना दादा के नक्शेकदम पर चलने लगे हैं जिसका परिणाम वो खुद तो भुगतेंगे साथ में भाजपा को भी बड़ा नुकसान होने वाला है।
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