भाजपा के रास्ते पर कांग्रेस सत्ता के शिखर तक पहुंचे की हो रही कवायद
मध्य प्रदेश कांग्रेस अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में लगी है। और अब कांग्रेस को ये बात समझ आ चुकी है कि पार्टी में अनुशासन का डंडा चलेगा तभी स्थिति नियंत्रित होगी अन्यथा कमजोर संगठन के सहारे चुनाव जीतना संभव नहीं होगा। इसी लिए अब कांग्रेस पार्टी जिला हो या फिर ब्लॉक की कार्यसमिति,जंबो बनाने के बजाय छोटी और नपी तुली बनाने पर जोर दे रही है। पार्टी नेता राहुल गांधी की पहल पर चलाए गए संगठन सृजन अभियान में इकाइयों को प्रभावी बनाने के लिए पदाधिकारियों की संख्या सीमित रखने के निर्देश के भी छिंदवाड़ा सहित अन्य जिला कार्यकारिणी में सदस्यों की संख्या 150 से लेकर 250 तक रखी गई। कांग्रेस में पहली बार चले अनुशासन के डंडे के कारण जिला कार्यकारिणी के सदस्यों की संख्या बड़े जिलों में अधिकतम 51 और छोटे जिलों में 30 पर सिमट गई। कहीं से असंतोष के स्वर भी सामने नहीं आए, क्योंकि सबको यह स्पष्ट कर दिया गया है कि केंद्रीय संगठन के स्पष्ट दिशा निर्देश हैं और उसकी अवहेलना किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी। तत्कालीन अध्यक्ष कमल नाथ की टीम में तीन हजार से अधिक पदाधिकारी हो गए थे। जिला कार्यकारिणी तो कुछ ही जिलों की घोषित हुई, पर पद सभी जिलों में पसंद और दबाव के आधार पर बंट गए। चुनाव के समय पदों की बंदरबांट हुईं मगर इसका कोई लाभ पार्टी को नहीं हुआ। भाजपा जिस प्रकार से पदाधिकारियों की बैठक कर निर्विवाद रुप से सदस्यों का चयन करती है ठीक उसी प्रकार कांग्रेस में भी कहा गया है कि जिलों में समन्वय समिति की बैठक कराकर समांजस्य बनाएं और फिर सर्वसम्मति से नाम प्रस्तावित करें ताकि किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो।
What's Your Reaction?