पहले इंदौर फिर दिल्ली में बजा 'घंटा' पुष्यमित्र भार्गव और कैलाश विजयवर्गीय को लगी फटकार मकर संक्रांति के बाद फिर सुनाई देगी गूंज
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल पीने से हुई मौतों के मामले में अधिकारियों के बाद मंत्री विजयवर्गीय और महापौर पर तलवार लटक रही है। और यह तलवार सिर्फ इस लिए लटक रही है क्योंकि शासन और प्रशासन की उन्होंने पोल खोल कर रख दी। दरअसल कैलाश विजयवर्गीय स्थानीय विधायक होने के साथ-साथ नगरीय प्रशासन मंत्री भी हैं लेकिन उनकी सरकार में स्थिति ये है कि अधिकारी सुनते तक नहीं हैं। और घटना होने के बाद जब मीडिया ने उनसे सवाल किया तो वो खुद पर कंट्रोल नहीं रख पाए और मीडिया कर्मियों से ही ग़लत तरीके से बात कर बैठे। उनके बयान ने बड़े नेता को बचा लिया और उन्होंने उड़ते हुए तीर को खुद पर ले लिया। कैलाश विजयवर्गीय का बयान जब मीडिया में चर्चा का विषय बन गया तो भाजपा हाई कमान के भी कान खड़े हुए और आनन-फानन में कैलाश विजयवर्गीय को दिल्ली तलब किया गया। शनिवार को विजयवर्गीय दिल्ली पहुंचे जहां वरिष्ठ नेताओं के साथ उनकी बैठक हुई। इस दौरान सीर्ष नेतृत्व के सामने कैलाश विजयवर्गीय ने भी अपना पक्ष रखा। बैठक के दौरान उन्हें कड़े लहजे में कहा गया है कि इस प्रकार के बयान से पार्टी की छवि धूमिल हुई है। वहीं महापौर पुष्यमित्र भार्गव के साथ इंदौर में प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने भी बात की है। इंदौर के भाजपा कार्यालय में एक बैठक भी आयोजित की गई थी। पुष्यमित्र भार्गव को भी बैठक के दौरान फटकार लगाई गई है। दरअसल जिस प्रकार से इंदौर के महापौर ने कहा था कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते उससे प्रदेश सरकार की प्रशासनिक तौर पर पोल खुल गई और सरकार की काफी किरकिरी हुई। इन सब बातों को देखते हुए भाजपा नेतृत्व काफी गंभीर हो गया है। इन नेताओं के बयान से पार्टी की छवि धूमिल होने के कारण अब उसकी भरपाई करने की कोशिश संगठन कर रहा है। इस मामले को और हवा उस वक्त लगी जब पूर्व सीएम उमाभारती ने एक्स पर लिखा कि जिस नेता की चल नहीं रही अधिकारी सुन नहीं रहे हैं तो फिर पद में बने रहने का क्या मतलब है। इस प्रकार के पद का ही क्या मतलब जब आप कुछ कर नहीं सकते हैं। उमा भारती के बयान के बाद प्रदेश संगठन भी जागा और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने इंदौर के भाजपा कार्यालय में बैठक कर डैमेज कंट्रोल करने का प्रयास करते हुए चेतावनी भरे लहजे में कहा कि भविष्य में इस प्रकार के बयानों की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। लेकिन इस बयान के बाद जिस प्रकार से सरकार की किरकिरी हुई है उससे यह स्पष्ट है कि मकर संक्रांति में तिल गुड़ की मिठास के साथ कड़वाहट आने के संकेत दे दिए गए हैं।
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