कांग्रेस के रास्ते पर प्रदेश की मोहन सरकार खुद को जनता से ऊपर समझती है सरकार
देश हो अथवा प्रदेश लगातार एक ही पार्टी की सरकार बनने से नेताओं में निर्भयता का माहौल बन जाता है मतलब उनमें किसी प्रकार का डर नहीं रह जाता। और जब डर नहीं होता तो सरकार निरंकुश हो जाती है। किसी जमाने में कांग्रेस के साथ यही स्थिति हुआ करती थी जब देश और प्रदेश में लगातार सरकार बन रही थी तो कांग्रेस में जनता के प्रति डर खत्म हो गया था। और वो जनता के भावनाओं की चिंता किए बगैर बेधड़क फैसले लेने लगी। वही स्थिति पिछले कुछ समय से मप्र सरकार में देखने को मिल रही है जहां जन भावनाओं को महत्व देने के बजाय सरकार सिर्फ अपना और पार्टी का लाभ देख रही है। यहां तक की पार्टी के कार्यकर्ता भी सरकार के इस रवैए से काफी नाखुश हैं क्योंकि सरकार व्यक्तिगत भावनाओं को महत्व दें रही है न कि जनभावनाओं को। पिछले कुछ समय से लगातार प्रदेश में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहां सरकार फैसले लेने में नाकाम रही अथवा खुद की मर्जी चलाती रही है जिससे प्रदेश के लोगों की राय सरकार के प्रति बदली है। जिस प्रकार से मंत्री विजय शाह का मामला आया फिर आइएएस संतोष वर्मा का विवादित बयान आया और उसके बाद मंत्री प्रतिमा बागरी के भाई का गांजा तस्करी का मामला आया तो सरकार ने इन किसी भी मामलों में संज्ञान नहीं लिया। यह तीन मामले महज एक उदाहरण है इन मामलों के अलावा भी अन्य कई मामले हैं जहां राज्य सरकार को त्वरित ऐक्शन लेना चाहिए था वहां पर सरकार ने ऐक्शन न लेकर यह साबित किया कि सरकार जनता से ऊपर है न कि जनता सरकार से ऊपर। बार-बार शिकायतें आने के बाद भी प्रदेश की मोहन सरकार खुद को सही साबित करने में लगी रही और दो साल की उपलब्धियां गिनाने में लगी रही जो हैं ही नहीं। जिस पटरी में इन दिनों मोहन एक्सप्रेस दौड़ रही है उसके रास्ते आने वाले काफी खतरनाक होने वाले हैं। क्योंकि सरकार जनता बनाती है और सरकार को जनता ही नकारती है। कांग्रेस ने भी इसी प्रकार की गलतियां की थी जो जनता के बर्दास्त के बाहर हुई तो प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को पूरी तरह से नकार दिया और आज तक कांग्रेस उस विश्वास को पाने में नाकाम रही है। ठीक वही स्थिति प्रदेश की मोहन सरकार के सामने भी देखने को मिल रही है।
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