बीजेपी में कार्यकर्ता अपने 'हित' पर 'आनंद' से चर्चा करते हुए कहते हैं भाई साहब हमें पार्टी से काम ही नहीं मिल रहा
सरकार बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी चुनाव के समय भर्ती अभियान शुरु कर देती है। उस अभियान में पार्टी का सिर्फ एक ही लक्ष्य होता है कि दूसरे दल के कार्यकर्ताओं को अपने दल में करो और उस दल को इतना कमजोर कर दो कि वो चुनाव जीतने के लायक ही न बचे। मप्र भाजपा ने साल 2023 से 24 के बीच साल भर यही किया। नतीजे के तौर पर पांच लाख से अधिक कार्यकर्ता भाजपा में शामिल हो गए और भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने में कामयाब हो गई। उस भर्ती अभियान का असर अब देखने को मिल रहा है जब पूरा प्रदेश ठंड की आगोश में समाया हुआ है और कार्यकर्ताओं के लिए भाजपा में काम नहीं है। एसाइआर में कार्यकर्ता थोड़ा व्यस्त हुए लेकिन अब उसकी पिक्चर भी खत्म होने लगी है। 97वे फीसदी से अधिक मंडल अध्यक्ष भी घोषित हो चुके हैं। जिलों की कार्यकारिणी भी 80 फीसदी घोषित हो चुकी है। निगम- मंडलों की नियुक्ति के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं के धैर्य की परीक्षा ले रही है। इस बीच खाली बैठे कार्यकर्ता प्रदेश कार्यालय में दस्तक दे रहे हैं। दिन भर पदाधिकारियों की खोज करते हैं कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल मिल जाएं अथवा संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा मिल जाएं जिनसे वो मिल कर अपना हालए दिल बयां कर सकें। इस बीच गुरुवार की शाम पांच बजे जब सूर्य देव की किरणें लाल पड़ती हैं तभी संगठन महामंत्री प्रदेश कार्यालय पहुंच कर ढलती हुई धूप में कुर्सी लगा कर बैठते हैं तो ऐसा लगता है जैसे कार्यकर्ताओं को संजीवनी लाते हुए हनुमान जी दिख गए हों। सभी कार्यकर्ता संगठन महामंत्री को चारों ओर से घेर कर उनसे काम मांगने लगते हैं। संगठन महामंत्री भी सभी कार्यकर्ताओं की भावना का सम्मान करते हुए उन्हें यथा उचित आश्वासन देकर पार्टी में काम करते रहने की बात कहते हैं। इस पूरी भीड़ का मतलब एक है कि उन्हें प्रदेश नेतृत्व की तरफ से काम दिया जाए क्योंकि इन कार्यकर्ताओं को जिलों की इकाइयां काम नहीं दे पा रही हैं लिहाजा सब काम करना चाहते हैं और पार्टी में अपनी उपयोगिता सिद्ध कर अपनी सियासी जमीन को उपजाऊ करना चाहते हैं।
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