संगठन की 'फटकार' के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया से बनाई दूरी प्रदेश कार्यालय में बचते नजर आए 'घंटा' मंत्री
भाजपा संगठन की फटकार के आगे बड़े-बड़े नेताओं की हीकड़ी निकल जाती है। और इसकी बानगी उस वक्त देखने को मिली जब गुरुवार को नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बीजेपी प्रदेश कार्यालय पहुंचे। दरअसल महीने के दूसरे गुरुवार को बीजेपी के सहयोग सेल में कैलाश विजयवर्गीय का नंबर आता है जिसके तहत वो प्रदेश कार्यालय पहुंचे थे। लेकिन ऐसा संयोग बना कि एक ही दिन दो विवादित मंत्रियों का नंबर लगने से मामला थोड़ा संवेदनशील बन गया। गुरुवार का सहयोग सेल सिर्फ खानापूर्ति बन कर ही रह गया। क्योंकि कार्यालय आए कैलाश विजयवर्गीय और प्रतिमा बागरी न सिर्फ मीडिया से बचते नजर आ रहे थे बल्कि वो पार्टी के पदाधिकारियों से भी नजर चुराते दिखाई पड़ रहे थे। महीने भर पहले राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी भी खूब सुर्खियों में थी क्योंकि गांजा तस्करी मामले में उनके भाई की गिरफ्तारी हुई थी और उन्होंने भी मीडिया कर्मियों से जिस प्रकार व्योहार किया था उसके बाद उन्हें भी प्रदेश कार्यालय तलब किया गया था। वहीं विजयवर्गीय इंदौर में दूषित पानी के बाद अपने विवादित बयान से देश भर की मीडिया में आंख की किरकिरी बने हुए हैं। और उनकी यह किरकिरी भाजपा के लिए भारी पड़ रही है। गुरुवार को प्रदेश कार्यालय आने पर विजयवर्गीय पहले संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा के साथ बैठे और फिर उसके बाद वो कार्यालय की कैंटीन में खाना खाने चले गए। इस प्रकार से उन्होंने दो घंटे का समय निकाल दिया करीब 15 मिनट सहयोग सेल में बैठे जहां उनके सुरक्षा कर्मियों ने इतना मजबूत घेरा बना रखा था कि कोई कार्यकर्ता जाना तो दूर उनसे मिलने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहा था। समय पूरा होने के बाद मीडिया कर्मियों ने पहले ही तैयारी कर रखी थी लिहाजा कैलाश विजयवर्गीय को इस बात का अहसास था कि एक बार फिर उनसे घंटा कांड पर जवाब मांगा जाएगा इसलिए वो मीडिया के सवालों से बचते नजर आए और उन्हीं के नक्शे कदम पर प्रतिमा बागरी भी चलती नजर आई। दोनों नेता प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल के चेंबर तक तो आए लेकिन मीडिया का सामना करने की दोनों में हिम्मत नहीं थी लिहाजा दोनों नेता अपने वाहन में बैठे और प्रदेश कार्यालय में अपने बैठने का कालम पूरा कर निवास की ओर रवाना हो गए।
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