संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल पर 'दमनकारी' रणनीति अपनाएगी सरकार हड़ताल में जाने वालों की होगी सेवा समाप्त
अपनी मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे संविदा स्वास्थ्य कर्मियों पर राज्य सरकार दमनकारी रणनीति अपनाने जा रही है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने आठ सूत्रीय मांग को लेकर मंगलवार से अनिश्चित कालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है। स्वास्थ्य कर्मियों के इस फैसले से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था एक दिन में ही चरमराने लगी है। यह स्थिति तब है जब पहले दिन हड़ताल का मिला जुला असर देखने को मिला। भोपाल,उज्जैन,सागर सहित प्रदेश के 35 जिलों से अधिक के स्वास्थ्य कर्मी हड़ताल पर हैं। वहीं हड़ताल को लेकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने बेहद कड़ा रुख अपना लिया है। काम पर न लौटने वाले संविदा कर्मियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए सेवा से हटाने का नोटिस जारी होना शुरु हो गया है। संविदा डाक्टरों,नर्सिंग स्टाफ,लैब टेक्नीशियनों और फार्मासिस्टों के सामूहिक अवकाश पर चले जाने के कारण ग्रामीण अंचलों से लेकर जिला अस्पतालों तक भारी अव्यवस्था का आलम देखने को मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने नियमित डाक्टरों और नर्सों को मोर्चे पर लगाया है फिर भी स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। मरीजों की बढ़ती कतार के कारण स्थिति खराब होती जा रही है। बहुत से मरीजों को बगैर इलाज के ही वापस लौटना पड़ रहा है। संविदा कर्मियों ने आनलाइन अटेंडेंस वाले सार्थक ऐप का उपयोग पूरी तरह से बंद कर डिजिटल कार्यों से भी दूरी बना ली है। स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से चरमराई व्यवस्था को देखते हुए ग्वालियर में 681 कर्मियों की सूची तैयार की गई है। इसी तरह अन्य जिला प्रशासनों की तरफ से भी सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। कर्मचारियों को सेवा से प्रकृति करने के लगातार आदेश जारी किए जा रहे हैं। काम नहीं तो वेतन नहीं का सिद्धांत लागू किया गया है। दूसरी तरफ मांग पूरी नहीं होने पर आठ जून को सीएम हाउस के घेराव का भी संविदा कर्मियों ने ऐलान कर रखा है। गौरतलब है कि 2023 विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सभी संविदा कर्मियों को नियमित कर्मचारियों की तरह वेतन और सूविधाएं देने का ऐलान किया था। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी लेकिन सीएम बदल गए ऐसी स्थिति में संविदा कर्मियों से किए सारे वादे भी भाजपा सरकार भूल गई और अब अधिकार की मांग करने पर उनके खिलाफ दमनकारी नीति अपनाई जा रही है।
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