भाजपा के हजारों कार्यकर्ताओं को एडजस्ट करने की तैयारी सहकारी चुनाव कराएगी सरकार
मध्य प्रदेश में सहकारी संस्थाओं के चुनाव कराने की तैयारी तेज हो गई है। चुनाव न होने के कारण वर्तमान में समितियों के कामकाज को संचालित करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशासक नियुक्त किया गया था। अब इन्हें मुक्त करके राजनीतिक नियुक्तियां की जाएंगी। गौरतलब है कि पिछले दिनों राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर सत्ता और संगठन की जो बैठकें हुईं, उनमें यह बात निकलकर सामने आई कि अब कार्यकर्ताओं को सहकारी और कृषि उपज मंडियों में समायोजित किया जाए। इसके लिए पहले मनोनयन होगा। इसकी तैयारी काफी समय से चल भी रही है लेकिन सहमति नहीं बनने के कारण मामला रुका हुआ था। प्रदेश में 4,345 सहकारी समितियों, 38 जिला सहकारी केंद्रीय बैंक और राज्य शीर्ष बैंक (अपेक्स बैंक) हैं। दरअसल सहकारी चुनाव के माध्यम से मोहन सरकार किसानों के बीच अपनी पकड़ मजबूत बनाने का सपना संजो रही है। यही कारण है कि समितियों से जुड़े लगभग 65 लाख किसानों तक सहकारिता चुनाव के माध्यम से भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को जोड़ेगी जो विधानसभा-लोकसभा के चुनाव में पार्टी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। पार्टी के पक्ष में वातावरण बनाने का दायित्व इन्हीं भी उन्हीं प्रशासकों का रहता है। प्रशासक उसे ही मनोनीत किया जाएगा जो समिति का सदस्य हो और चुनाव लड़ने की पात्रता रखता हो। यानी डिफाल्टर न हो। किसी प्रकार का आपराधिक रिकार्ड न हो।
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