भाजपा में हो रही हेलीकाप्टर लैंडिंग नियुक्तियों से जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष
मप्र भाजपा में महीने भर पहले प्रदेश कार्यकारिणी घोषित हुई थी उसके बाद तीन और नियुक्तियां होने से कार्यकर्ताओं में असंतोष की स्थिति पनपने लगी है। दरअसल भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ता आधारित दल माना जाता है। जिसमें कार्यकर्ता ही सर्वोपरि होता है। यहां विशेष बात यह है कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान संगठन के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं की अलग-अलग जगहों पर ड्यूटी लगाई जाती है। सिर्फ प्रदेश कार्यालय ही नहीं जिलों से भी कार्यकर्ताओं को चुनाव ड्यूटी में महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा जाता है लेकिन जब पार्टी के संगठन विस्तार की बात आती है तो क्या ऐसे कार्यकर्ताओं को पार्टी याद करती है। इस बात को लेकर कई कार्यकर्ताओं के मन में असमंजस की स्थिति है। दरअसल मप्र भाजपा के संगठन में हाल ही में ताबड़तोड़ नियुक्तियां हुई हैं। लेकिन उन नियुक्तियों में नेताओं के गुट हावी होते दिखे हैं। जितने भी पदाधिकारी बने हैं वो सभी किसी नेता के करीबी हैं अथवा उनका संघ से रिस्ता रहा है। जीमीनी कार्यकर्ता एक भी देखने को नहीं मिला है। बीच-बीच में अपवाद स्वरुप केन्दीय नेतृत्व जरुर एकाध ऐसी नियुक्तियां करता है जिससे लाखों कार्यकर्ताओं को संजीवनी मिल जाती है कि पार्टी हर प्रकार के कार्यकर्ताओं पर नजर रखती है और समय आने पर उन्हें चुनाव में मौका देती है। लेकिन यह एक अपवाद ही साबित हो रहा है। जिस दल में लाखों कार्यकर्ता हों वहां पर किसी एक जमीनी कार्यकर्ता को मौका देना ऊंट के मुंह में जीरे जैसा साबित हो रहा है। क्योंकि जब पदों की मलाई खाने का वक्त आता है तो हेलीकाप्टर लैंडिंग से नियुक्तियां कर दी जाती है और यही बात कार्यकर्ताओं के गले नहीं उतर रही है। क्योंकि चुनाव में असल भूमिका तो कार्यकर्ता ही निभाता है। झंडा,बैनर और दरी बिछाने से लेकर हर काम जमीनी कार्यकर्ता ही करता है। यही कारण है कि जिस प्रकार से पार्टी में नियुक्तियां हो रही हैं उससे कार्यकर्ताओं में असंतोष की लहर पनप रही है। हांलाकि इसमें मरहम लगाने का प्रयास प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने किया है। जिस प्रकार से कार्यकर्ता अपने काम के लिए मंत्रियों के बंगले का चक्कर लगाते थे तो अब कार्यकर्ताओं को मंत्रियों के बंगले नहीं झांकने पड़ेंगे बल्कि मंत्री अब कार्यकर्ताओं को प्रदेश कार्यालय में ही मिलेंगे। और उनकी समस्या का समाधान भी आन स्पाट करेंगे। अब देखना यही है कि कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने की जो कोशिश प्रदेश अध्यक्ष ने की है वो कोशिश कार्यकर्ताओं को रास आएगी अथवा नाराजगी का आलम कुछ और तरीके से गुल खिलाएगा।
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