अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर सवर्णों को गाली दो और नेता बन जाओ मध्य प्रदेश में चल रहा माहौल
मप्र की राजनीति आजादी से आज तक सवर्णों पर ही निर्भर रही है। प्रदेश में आबादी किस वर्ग की सबसे ज्यादा है यह बात तो जाति आधारित जनगणना के बाद ही क्लियर होगी लेकिन सत्ता की चाह में नेता खुद की जाति और समाज को हासिए पर रख रहे हैं। हाल ही में जिस प्रकार से कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने सवर्ण वर्ग को लेकर बयान दिया उससे उनकी विकृत मानसिकता का परिचय हुआ। फूल सिंह बरैया ने यह भी बता दिया कि उनकी जुवां जब भी खुलेगी सवर्णों के खिलाफ ही खुलेगी। लेकिन ऐसे नेताओं को जब दिग्विजय सिंह जैसे नेता का समर्थन मिल जाता है तो वो चलते फिरते मानव बम की तरह हो जाते हैं। और अब तो दिग्विजय सिंह ने फूल सिंह बरैया के बयान पर मुहर लगाते हुए उनका बचाव किया और कहा कि यह बयान उनका व्यक्तिगत नहीं बल्कि बिहार के विविध के दर्शन शास्त्र विभाग के अध्यक्ष रहे हरिमोहन झा की पुस्तक का उल्लेख किया था। गौरतलब है कि बरैया का बयान आने के बाद वो इंदौर में राहुल गांधी के साथ नजर आए। जिसको लेकर भाजपा ने जमकर माहौल खड़ा करने की कोशिश की। और जब भाजपा ने राहुल गांधी पर प्रहार करना शुरु किया तो पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने पूरे मामले में एंट्री लेते हुए फूल सिंह बरैया का बचाव करने में देरी नहीं लगाई। इस पूरे मामले में सवर्णों के प्रति भाजपा और कांग्रेस दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों की स्थिति संदिग्ध है। ऐसा इसलिए क्योंकि इन पार्टियों को लगता है कि एससी,एसटी और ओबीसी के बल पर ही इनकी सरकार बनती है। इन्हें लगता है कि सरकार बनाने के लिए इन तीनों वर्गों को किसी भी प्रकार से खुश करना है। और अगर सवर्ण वर्ग को गाली देकर ही राजनीतिक लाभ मिलता है तो उससे परहेज क्यों लिहाजा अब नेताओं की रणनीति का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है कि ब्राह्मण,ठाकुर को गाली दो और नेता बन जाओ क्योंकि बड़े वर्गों को साध लिया तो सवर्ण वर्ग के पास भाजपा और कांग्रेस में रहने के अलावा कोई दूसरा रास्ता ही नहीं होगा लिहाजा गाली देकर ही राजनीतिक लाभ मिलता है तो गाली दो और लाभ लो।
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