सरकार के लिए ब्राह्मण बेटियों के सम्मान से ज्यादा आइएएस संतोष वर्मा जरुरी
मप्र में के हर जिले में आइएएस संतोष वर्मा को लेकर कई तरह के विरोध प्रदर्शन हुए। सीएम मोहन यादव को भी बार-बार ज्ञापन दिया गया लेकिन अब तक राज्य सरकार आइएएस संतोष वर्मा मामले में कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। ठीक उसी प्रकार जैसे मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया के खिलाफ बयान दिया था जिसके बाद ढेरों प्रदर्शन हुए लेकिन आदिवासी वोटबैंक न बिगड़े इसलिए सीएम मोहन यादव ने विजय शाह के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया बाद में जनता भी तक हार कर बैठ गई। कुछ उसी प्रकार की स्थिति अब आइएएस संतोष वर्मा के मामले में भी देखने को मिल रही है। जहां ब्राह्मण बेटियों के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने वाले संतोष वर्मा को लेकर राज्य सरकार अब तक कोई भी फैसला करने में हिम्मत नहीं जुटा पाई है। जबकि इस मामले को लेकर अब जनप्रतिनिधि भी खुल कर सामने आ चुके हैं। मंगलवार को भाजपा और कांग्रेस के ब्राह्मण विधायकों ने सीएम मोहन यादव से मुलाकात कर संतोष वर्मा के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध करते हुए एक ज्ञापन भी सौंपा है। सीएम मोहन यादव ने सभी विधायकों के साथ फोटो तो खिंचवा ली लेकिन अभी तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई का निर्देश जारी नहीं किया गया है। जबकि भाजपा को ये मालूम है कि जब-जब ब्राह्मण भाजपा से रुठा है तब-तब प्रदेश में भाजपा को सत्ता का बनवास भोगना पड़ा है। शायद मोहन सरकार साल 2018 को भूल चुके हैं जब पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने 'माई के लाल' जैसा शब्द बोल कर ब्राह्मणों को चैलेंज देने का प्रयास किया था। नतीजे के तौर पर सिर्फ ग्वालिर-चंबल तरफ के ही सवर्णों ने भाजपा से दूरी बनाई तो सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी अगर विंध्य का स्वर्ण वर्ग भाजपा से अलग होता तो सिंधिया के आने से भी भाजपा की सरकार नहीं बन पाती। इस बार तो ब्राह्मण बेटियों के सम्मान की बात है। भाजपा सरकार को लग रहा है कि मामला शांत हो जाएगा। लेकिन हकीकत तो यह है कि इस बार समाज के सबसे प्रबुद्ध वर्ग के सम्मान को ठेस पहुंचाने का कार्य किया गया है। ऐसी स्थिति में सरकार का अड़ियल रवैया भाजपा को डुबोने के लिए पर्याप्त होगा।
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