एमपी मे सरकार और संगठन को चला रहा तीसरा व्यक्ति फैसलों के लिए नहीं स्वतंत्रता
मप्र में देखने के लिए तो सरकार और संगठन में सबकुछ ठीक चल रहा है लेकिन हकीकत यही है कि इस सरकार और संगठन की कमान किसी तीसरे व्यक्ति के हाथ में ही है। सरकार में फैसले लेने की बात हो अथवा संगठन में सभी जगहों पर तीसरा व्यक्ति ही फैसले ले रहा है। यही कारण है कि सरकार और संगठन दोनों जगहों पर अप्रत्याशित फैसले देखने को मिल रहे हैं। आमतौर पर भाजपा के संगठन को कैडर बेस संगठन कहा जाता है लेकिन दो महीने पहले हुई भाजपा की नियुक्तियों ने जिस प्रकार से लोगों को हैरान और परेशान किया है उससे इन बातों का खुलासा हुआ है। हांलाकि सभी बातों से ध्यान भटकाने के लिए प्रदेश कार्यालय में अलग-अलग तरह के नवाचार किए जा रहे हैं लेकिन उनका कुछ खास असर होता नहीं दिख रहा है। हाल ही में निगम-मंडलों की नियुक्ति को लेकर प्रदेश नेतृत्व की तरफ से काफी जद्दोजहद देखने को मिल रही है। अगर यह नियुक्तियां आसान होती तो अब तक निगम-मंडलों की घोषणा हो चुकी होती लेकिन ऐसा नहीं है। सरकार और संगठन के आपसी समन्वय में कई बार निगम-मंडल की लिष्ट तैयार हुई और कई बार उसे डस्टबिन में डाला जा चुका है। यहां तक कि निगम मंडल की लिस्ट को लेकर दिल्ली में भी नेताओं से रायशुमारी की जा चुकी है उसके बाद भी सहमति नहीं बन पाई। दूसरी तरफ जो खुद को निगम-मंडल के दावेदार के तौर पर देखते हैं वो ऐसा कोई दरवाजा नहीं जिसको उन्होंने न खटखटाया हो। इन सब चीजों को देखते हुए स्तितियां कठिन होती चली गई। गाहे-बगाहे सरकार और संगठन तीसरे दरवाजे में ही पहुंच कर लिस्ट को फायनल करने का अनुरोध कर रहे हैं। क्योंकि सरकार और संगठन में अब काफी दबाव की स्थिति बन गई है। सोमवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में भी सीएम मोहन यादव ने संकेत देते हुए कहा है कि जल्द ही निगम-मंडलों की नियुक्ति कर दी जाएगी।
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