रीवा में मिठाई दुकानों की 'सेटिंग' से खाद्य विभाग की होती हैं कार्रवाई,भोपाल में सिर्फ कार्रवाई 'परिणाम' नहीं
रीवा में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर अब सवाल उठने लगे हैं। विभाग जहां नई खुली मिठाई और खाद्य दुकानों पर सख्ती दिखा रहा है, वहीं वर्षों से संचालित पुरानी दुकानों पर उसकी मौन स्वीकृति है। शहर के शिल्पी प्लाज़ा, मार्तंड कॉम्प्लेक्स, नया बस स्टैंड, धोबिया टंकी और जानकी पार्क क्षेत्र में वर्षों से मिठाई और स्नैक्स की दुकानें संचालित हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन दुकानों में कभी भी खाद्य विभाग की जांच नहीं होती। वहीं नई खुली दुकानों पर विभाग अचानक पहुंचकर नोटिस, चालान और नमूना जांच की कार्रवाई करता है। दुकान संचालकों में यह सुगबुगाहट तेज है कि खाद्य विभाग का यह रवैया "सेटिंग और समझौते" का परिणाम है। कई नागरिकों का कहना है कि पुरानी बड़ी दुकानों पर विभाग की ‘मिठास’ का असर साफ झलकता है — क्योंकि मिठाई सबको पसंद है, लेकिन जांच सिर्फ चुनिंदा पर ही होती है। स्थानीय व्यापारियों ने भी इस पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि नए व्यापारियों को डराने के लिए विभाग अचानक दबिश देता है, जबकि वर्षों से चल रही दुकानों को पूरी तरह छूट मिली हुई है। शहरवासी मांग कर रहे हैं कि जिला प्रशासन इस मामले की जांच करे और सभी दुकानों पर समान रूप से कार्रवाई हो। रीवा की तरह ही राजधानी भोपाल में भी यही हाल देखने को मिल रहा है। सिर्फ होली और दिवाली में जागने वाली खाद्य विभाग की टीम यहां भी माथा देख कर टीका लगाने का काम करती है। भोपाल में कार्रवाई तो होती है लेकिन उसके परिणाम जनता के सामने नहीं आते हैं।
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