दतिया के 'कुरुक्षेत्र' में महारथी मैदान में और 'चतुरंगिनी' सेना रण क्षेत्र से बाहर कैसे हो 'चक्रव्यूह' की रचना टेंशन में भाजपा
दतिया अब महज चुनाव का रण नहीं बल्कि कुरुक्षेत्र बन चुका है। मजे की बात यह है कि इस कुरुक्षेत्र में सेना ने हथियार डाल दिए हैं। और महारथी अकेले मैदान पर जाने में हिचकिचाहट महसूस कर रहे हैं। जिस प्रकार से पूर्व गृह मंत्री डाक्टर नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटा गया और आशुतोष तिवारी को टिकट दिया गया उसका गुस्सा देश भर की जनता ने देखा। अपनी ही सरकार में भाजपा कार्यकर्ताओं ने लाठियां खाईं और आंसू गैस के गोले झेले,करीब 17 कार्यकर्ताओं पर FIR दर्ज हुई जिसे अब तक वापस नहीं लिया गया है। ऐसी स्थिति में भाजपा के नेता उन्हीं कार्यकर्ताओं से जनता के बीच जाने की और वोट मांगने की बात कह रहे हैं। 16 जुलाई से पूर्व गृह मंत्री डाक्टर नरोत्तम मिश्रा ने भी कुरुक्षेत्र में कदम रख दिया है। इस बार पूर्व गृह मंत्री रथी नहीं सारथी की भूमिका में हैं। पूर्व गृह मंत्री ने चुनावी रण में कदम तो रख दिया लेकिन उनकी चतुरंगिनी सेना रण में कदम रखने के लिए तैयार नहीं हैं क्यों उनकी आंखों के आंसू और पीठ पर पड़े पुलिस के डंडे का घाव नहीं सूखा है। महज 13 दिन बाद वोटिंग होनी है। ऐसी स्थिति में भाजपा पदाधिकारियों को दतिया की तासीर और वहां का माहौल समझ में आ चुका है। गुरुवार को भाजपा के पदाधिकारियों ने दतिया में बड़ी बैठक कर कार्यकर्ताओं को घर से निकालने और चुनाव को अपने पाले में लाने की रणनीति बनाई है। हफ्ते भर पहले जिस नेता का भाजपा ने टिकट काटा उसी नेता को चुनाव संचालन समिति का प्रमुख बनाया गया है। उनके साथ चुनाव संचालन समिति में 31 लोगों को और शामिल किया गया है जो दतिया फतह में 'सारथी' की भूमिका निभाएंगे। इतना सबकुछ होने के बाद सवाल अब भी वही हैं कि क्या दतिया में भाजपा के कार्यकर्ता घर से निकलेंगे।
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