कैलाश के अंदर का दर्द आया बाहर कहा विधानसभा की तरह सरकार का सचिवालय काम करे तो तस्वीर बदल जाएगी
मध्य प्रदेश की मोहन सरकार किस प्रकार से प्रशासनिक तौर पर मजबूत है उसकी मिशाल आए दिन देखने को मिलती रहती है। प्रदेश के किसी भी शासकीय कार्यालय में 11 बजे के पहले अधिकारी और कर्मचारी नहीं पहुंचते जबकि वर्किंग टाइम 10 बजे का है। दरअसल अधिकारियों और कर्मचारियों की लेट लतीफी का आलम सिर्फ राजधानी से बाहर नहीं है यह चेन वल्लभ भवन से ही शुरु होती है जहां पर कोई भी अधिकारी और कर्मचारी 11 बजे के पहले कार्यालय नहीं पहुंचता है। पिछले कुछ दिनों से इस बात को लेकर लगातार चर्चा भी हो रही है। इस बीच शुक्रवार को समाप्त हुए विधानसभा के बजट सत्र के बाद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के अंदर का दर्द बाहर आ गया। उन्होंने कहा कि अगर विधानसभा के सचिवालय की तरह मध्य प्रदेश सरकार का सचिवालय काम करने लगे तो शायद प्रदेश की तस्वीर और ही होगी। मतलब साफ है कि प्रदेश सरकार के मंत्री खुद इस बात से परेशान हैं। क्योंकि अधिकारियों और कर्मचारियों की मनमानी से वो भी काफी परेशान हैं लेकिन उनके हाथ में इतना अधिकार नहीं है कि वो कोई भी ऐक्शन ले सकें। प्रदेश की निरंकुश होती शासकीय व्यवस्था अब न सिर्फ आम नागरिकों के लिए समस्या का सबब बन रही है बल्कि प्रदेश सरकार के मंत्री भी इस सरकारी तंत्र से काफी परेशान हैं लेकिन वो कुछ कर नहीं सकते क्योंकि किसी भी मंत्री के पास कोई एक्शन लेने का कोई अधिकार नहीं है।
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