नारी शक्ति के आगे 'वंदन' करती एमपी की राजनीति सड़क के बाद सदन में होगी 'निंदा'
भारत में नारी को शक्ति का दर्जा दिया गया है और नारी को देवी के रुप में पूजा जाता है। लेकिन पिछले कुछ सालों से नारी सरकार बनाने का एक रास्ता बन चुकी है। महिलाओं को अपने-अपने पक्ष में करने के लिए राजनीतिक दल अलग-अलग प्रलोभन वाली योजना की घोषणा भी करते रहे हैं। उसी योजना में 'लाड़ली बहना' योजना शामिल हैं लेकिन अब भाजपा उससे आगे निकलने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसके मंसूबे कामयाब नहीं हुए। लिहाजा लोकसभा में मोदी सरकार द्वारा लाए गए नारी वंदन अधिनियम को जब कामयाबी नहीं मिली तो उसे राज्यों के स्तर पर भेज दिया गया जिससे महिलाओं की भावना का लाभ उठाया जा सके। मध्य प्रदेश भाजपा की तरफ से भोपाल से लेकर प्रदेश के ब्लाक स्तर तक आक्रोश यात्रा निकाल कर विपक्ष का जमकर विरोध किया गया लेकिन सामाजिक तौर पर आक्रोश यात्रा में महिलाओं ने कोई इंट्रेस्ट नहीं लिया। सिर्फ भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ता ही सड़क पर नजर आई। भोपाल में जब प्रदर्शन हुआ तो 500 रुपये देकर मजदूरी का काम करने वाली महिलाओं को अलग-अलग जिलों से ढोया गया जिन्हें यही नहीं मालूम कि उन्हें भोपाल क्यों लाया गया है। अब उस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने एक दिवसीय विधानसभा सत्र आयोजित किया है। जिसमें कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया जाएगा। लेकिन उसके पहले कांग्रेस ने भी अपना होमवर्क मजबूत कर रखा है। सत्ता पक्ष के प्रत्येक आरोप का जवाब देने के लिए कांग्रेस विधायकों ने तैयारी की है। Mukhbir को मिली जानकारी के अनुसार महिला आरक्षण संबंधी संशोधन विधेयक जिस तरह से लोकसभा में गिराया उसे कांग्रेस का महिला विरोधी चेहरा बता कर निंदा प्रस्ताव पारित कराया जाएगा। अब सवाल इस बात का उठता है कि जिस बिल पर प्रदेश की गृहणियों का इंट्रेस्ट नहीं है उस बिल को जबरन क्यों थोपने का प्रयास किया जा रहा है। सिर्फ राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए महिलाओं को इस्तेमाल किया जा रहा है। जबकि आरक्षण की बात करने वाली भाजपा में आज भी महिलाओं को उतना स्थान नहीं मिला है जितना पुरुषों को है। भाजपा ने जिलों की कार्यकारिणी में जरुर 33 फीसदी महिलाओं को स्थान दिया है लेकिन जब बात प्रदेश इकाई की आती है तो वहां पर पुरुष नेताओं का ही वर्चस्व दिखाई पड़ता है।
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