रिटायरमेंट का नहीं कोई प्लान 'अनशन' पर बैठेंगे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरने का ऐलान कर दिया है। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश के 14 जिलों में उत्पादित बासमती चावल को भोगोलिक संकेत जीआई टैग नहीं दिया जा रहा है जिससे एमपी के किसानों को बड़ा नुकसान हो रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्रीय कृषि मंत्री के रुप में पहले नरेन्द्र सिंह तोमर और अब शिवराज सिंह चौहान हैं। उसके बाद भी एमपी के किसानों को अपने बासमती चावल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है जबकि इसी चावल की विदेशों में भारी मांग के चलते अच्छी कीमत मिलती है। पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश की मोहन सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि अन्य राज्यों के मिल मालिकों और व्यापारिक लावी के दबाव के कारण मध्यप्रदेश के किसानों के साथ भेदभाव हो रहा है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि एमपी के किसान 27 लाख टन से ज्यादा बासमती चावल का उत्पादन करते हैं और हर साल घाटे का सौदा करते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने ऐलान करते हुए कहा कि अगर जून के महीने तक राज्य सरकार बासमती चावल के जीआई टैग मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाती है तो वो अनशन पर बैठने के लिए मजबूर हो जाएंगे और उसकी जिम्मेवार प्रदेश की सरकार होगी। इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री ने राजनीति से रिटारमेंट की खबर पर विराम लगाते हुए कहा कि वो संन्यास नहीं ले रहे हैं बल्कि आखिरी सांस तक वो पार्टी के लिए काम करते रहेंगे और पार्टी उन्हें जो भी काम देंगी वो उस काम को करते रहेंगे। गौरतलब है कि साल 2018 में दिग्विजय सिंह ने नर्मदा परिक्रमा की थी तब प्रदेश में कांग्रेस सरकार की 15 साल बाद वापसी हुई थी। और अब वो एक बार फिर राजनीति में बगैर कोई पद लिए आखिरी पारी खेलने के मूड में हैं लिहाजा भाजपा को यह समझ लेना चाहिए कि दिग्विजय सिंह का किसानों पर खेला गया दांव कोई सामान्य दांव नहीं है क्योंकि देश का किसान ही सरकार बनाता है लिहाजा किसानों को अगर वो अपने पक्ष में करने में कामयाब होते हैं तो भाजपा के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। पूर्व सीएम ने अपने बयान के माध्यम से अप्रत्यक्ष तरीके से यह भी बता दिया है कि वो अब साल 2018 तक 14 जिलों में सक्रिय होकर किसानों के मूड को बदलने का प्रयास करते रहेंगे।
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