लोकसभा चुनाव प्रबंधन समिति के सदस्य रहे कार्यकर्ताओं को अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से बढ़ी उम्मीद अब निराशा में हो रही तब्दील
भारतीय जनता पार्टी ने साल 2024 के लोकसभा चुनाव में पहली बार मध्य प्रदेश में क्लीनस्वीप कर राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया था। उस वक्त पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा थे और वर्तमान अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को लोकसभा चुनाव प्रबंधन समिति का संयोजक बनाया गया था। हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में मझे हुए कार्यकार्ताओं को शामिल किया गया था जो लोकसभा चुनाव को जीतने की रणनीति के साथ अन्य चुनावी अभियान को अंजाम देने का काम करते थे। जिस प्रकार से हेमंत खंडेलवाल और उनकी टीम ने लोकसभा चुनाव जीतने के लिए अपनी रणनीतियों को धरातल में उतारा वो सब सही साबित हुई और उसी का नतीजा है कि मध्य प्रदेश में पहली बार भाजपा ने सभी 29 लोकसभा सीटें जीत कर इतिहास दर्ज कर दिया। चुनाव खत्म होने के बाद इनाम के तौर पर हेमंत खंडेलवाल को मध्य प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बना दिया गया लेकिन उनकी टीम के सदस्य रहे कार्यकर्ताओं का हाथ आज भी खाली है। लोकसभा चुनाव प्रबंधन कमेटी में सदस्य रहे भाजपा कार्यकर्ता अब वर्तमान अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की तरफ आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं। क्योंकि कप्तान कितना भी प्रभावशाली अथवा दमदार क्यों न हो लेकिन जब तक टीम के अन्य प्लेयर ठीक नहीं होंगे तब तक मैच जीतना कठिन होता है। लिहाजा अब लोकसभा चुनाव प्रवंधन कमेटी के सदस्यों को उम्मीद है कि हेमंत खंडेलवाल उन्हें टीम में कहीं न कहीं अर्जेस्ट जरुर करेंगे और उन्हें टीम में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी जरुर सौंपेंगे। लेकिन अभी तक जिस प्रकार से भाजपा में संगठनात्मक नियुक्तियां हुई हैं और लोकसभा चुनाव प्रबंधन कमेटी के सदस्य रहे कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया गया है उससे कार्यकर्ताओं में निराशा का माहौल देखने को मिल रहा है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ कार्यकर्ताओं का यही कहना है कि जब पार्टी को जरुरत थी तो उनका इस्तेमाल किया गया और उसके बाद टिशू पेपर की तरह फेंक दिया गया। कार्यकर्ताओं में बढ़ती निराशा आने वाले समय में भाजपा के लिए घातक साबित हो सकती है। लिहाजा ऐसे कार्यकर्ताओं पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को ध्यान देना होगा जो उनके नेतृत्व में पहले काम कर चुके हैं।
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