अब केवट ही भाजपा की नैया लगाएंगे पार जो केवट को हराएगा वो 'श्रीराम द्रोही' कहलाएगा
श्रीराम चरित मानस में केवट का बड़ा प्रसंग है। महर्षि वाल्मीकी द्वारा लिखी श्रीमद् रामायण में केवट को ही भगवान श्रीराम ने अपना मित्र बनाया था और फिर उसी ने भगवान राम को गंगा के पार पहुंचाया था। भगवान राम और निषाद राज की उस दोस्ती को अब कलियुग में भाजपा चरितार्थ करने जा रही है। जहां श्रीराम राजा की नगरी ओरछा से आने वाले महेश केवट को भारतीय जनता पार्टी ने अपने तीसरे उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा प्रत्याशी बना कर मास्टर स्ट्रोक खेल दिया है। इसके पीछे धार्मिक,जातीय और वोट की सोशल इंजीनियरिंग शामिल है। दरअसल मध्य प्रदेश में इस समाज के करीब 12 से 13 लाख लोग निवास करते हैं जिन्हे एक करने के लिए महेश केवट काम करेंगे। उससे पहले महेश केवट को साल 2027 में उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव इस्तेमाल किया जाएगा। संख्या के आधार पर इस समाज को अब तक सरकार और संगठन में उतना प्रतिनिधित्व नहीं मिला था जितना मिलना चाहिए था। लिहाजा अब भाजपा ने केवट समाज को न सिर्फ गले लगाया है बल्कि सत्ता और संगठन में प्रतिनिधित्व देने की योजना बनाते हुए केवट समाज को एकजुट कर उसके वोट बैंक को साधने की एक सफल कोशिश की है। ये बात और है कि जिन महेश केवट को भाजपा ने साल 2022 में पार्टी विरोधी गतिविधियां संचालित करने के विरोध में बाहर का रास्ता दिखाया था उन्हीं महेश केवट को महीने भर पहले मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया और अब वो राज्यसभा की तीसरी सुट के लिए भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर सामने खड़े हैं। श्रीराम राजा की नगरी से आने वाले महेश केवट अब मध्य प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी श्रीराम के नाम पर हमेशा राजनीति करती रही है। लिहाजा अब जो महेश केवट का विरोध करेगा वो 'श्रीराम द्रोही' कहलाएगा।
What's Your Reaction?