'सवर्ण' विरोधी होती भाजपा के लिए अब कठिन होगी आगे की राह 'सवर्ण' के नेताओं को भी किया जा रहा साइड लाइन
जिस भारतीय जनता पार्टी को विकास के नाम पर जाना जाता था आज उसी भारतीय जनता पार्टी पर जातियों को बढ़ावा देने के आरोप लगने लगा है। जिस भाजपा को ब्राह्मण और बनियों की पार्टी कहा जाता था वहीं भाजपा अब सामान्य वर्ग का दमन करने वाली पार्टी बन चुकी है। पिछले कुछ महीनों से भाजपा की सरकार में सामान्य वर्ग के प्रति जिस प्रकार से बयानबाजी हुई और उसमें सरकार ने कोई एक्शन नहीं लिया। इतना ही नहीं UGC मामले के बाद तो मानो देश भर का सामान्य वर्ग आज खुद को कोस रहा है कि उसने भाजपा को वोट क्यों दिया। एमपी में आइएएस संतोष वर्मा ने ब्राह्मण बेटियों के खिलाफ अभद्र बयान दिया उसके बाद भी मोहन सरकार ने कोई एक्शन नहीं लिया। कुल मिला कर ब्राह्मण बनिया की पार्टी कहलाने वाली भाजपा ने ऐसे रंग बदला कि आज उसका कोर वोटर ही भाजपा से नफ़रत करने लगा है। सबसे बड़ी समस्या इस बात की है कि बिगड़ते समीकरण के बाद भी अभी भाजपा का आला कमान नहीं चेता है। भाजपा को लग रहा है कि वो एससी,एसटी और ओबीसी को साध लेगा तो सरकार से उसे कोई नहीं हटा सकता है। शायद भाजपा को इस बात का अहसास नहीं है कि जिस सामान्य वर्ग को वो न के बराबर समझते हैं वही सामान्य ग्रामीण अंचलों में हर वर्ग के वोट को इकट्ठा करके भाजपा के पक्ष में वोट करवाता है। लेकिन सत्ता के मद में चूर भाजपा आज सिर्फ जातियों में प्रदेश को बांटने का काम कर रही है। और इसकी शुरुआत भी साल 2018 से हुई थी जब पूर्व सीएम शिवराज ने माई के लाल कह कर सामान्य वर्ग को ललकारने का काम किया था और नतीजे के तौर पर भाजपा 109 सीटों में सिमट कर रह गई थी। अब उसी नक्शेकदम कर सीएम मोहन यादव भी चल रहे हैं। हर जगह पर सामान्य वर्ग को उपेक्षित कर अन्य वर्गों को साधने की कोशिश हो रही है। और वर्तमान में देश भर का सामान्य वर्ग अब अपने समय का इंतजार कर रहा है क्योंकि समय पांच साल में एक बार ही आता है लिहाजा सरकार की हर हरकत पर सामान्य वर्ग नजर बनाए हुए है जिसका समय आने पर माकूल जवाब दिया जाएगा।
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