विस , लोस और अब रास सहित तीनों सदनों में कांग्रेस को हार मिली लेकिन 'सबक' नहीं मिला
मध्य प्रदेश कांग्रेस का तो जैसे नसीब ही फूट चुका है। जिस चुनाव में जाते हैं वहीं पर हार का सामना करना पड़ता है। कई बार तो जीत कर भी हार जाते हैं। इसी लिए कहते हैं जो जीता वही सिकंदर। इस हार जीत की कहानी साल 2020 से शुरु हुई थी। जब कांग्रेस के 22 विधायक चोरी हो गए और कांग्रेस को उनकी भनक तक नहीं लगी और प्रदेश में तख्ता पलट हो गया। उसके बाद साल 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान ऐन मौके पर इंदौर से कांग्रेस उम्मीदवार गायब हो गया। और अब राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन ही रद्द हो गया जिससे चुनाव लड़े बगैर ही कांग्रेस हार गई। दर असल कांग्रेस को आंशका थी कि विधायकों की खरीद फरोख्त होगी इसलिए कांग्रेस अपने विधायकों की बाड़ेबंदी में लगी रही। विधायकों को फ्लाइट में बैठा भी दिया गया। लेकिन भाजपा ने तो पहले ही स्क्रिप्ट लिख रखी थी। जैसे ही कांग्रेस विधायक एयरपोर्ट के लिए निकले तो भाजपा की तरफ से मीनाक्षी नटराजन के आपराधिक रिकार्ड का बहीखाता खोल दिया गया। विधानसभा के बाहर घंटों तक हाई बोल्टेज ड्रामा चलता रहा। आखिर में निर्णय आया कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने हलफनामें में आपराधिक जानकारी छुपाई है इसलिए उनका नामांकन रद्द किया जाता है। आदेश मिलते ही कांग्रेस नेताओं को सांप सूंघ गया। दिन में ही अंधेरा दिखने लगा। समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। इस बीच उन्हें लगा कि शायद निर्वाचन आयोग के बाहर धरना देने से कुछ बात बन जाए। लिहाजा दरी लेकर कांग्रेस विधायक निर्वाचन आयोग पहुंचे जहां पहले से ही बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था। आयोग के गेट पर ताला जड़ दिया गया। थक हार कर कांग्रेस नेताओं ने गेट के बाहर दरी बिछाई और वहीं पर लेट गए रात भर यह हाई बोल्टेज ड्रामा चलता रहा लेकिन मतलब कुछ भी नहीं निकला और भाजपा अपने तीनों उम्मीदवारों को जिता चुकी थी। इसी लिए कहते हैं कि कांग्रेस जहां से सोचना बंद करती है भाजपा वहीं से सोचना शुरु करती है।
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