जिन 'ब्राह्मणों' से सरकार गीता पाठ कराएगी उन्हीं 'ब्राह्मणों' की बेटियों को अपशब्द कहने पर मौन 'मोहन' सरकार
आइएएस संतोष वर्मा के विवादित बयान को लेकर प्रदेश भर में आंदोलन हो रहे हैं। ब्राह्मण वर्ग लगातार आइएएस संतोष वर्मा पर कार्रवाई की मांग कर रहा है। धरने-प्रदर्शन हो रहे हैं लेकिन राज्य सरकार के कानों में जू तक नहीं रेंग रही है। मजे की बात यह है कि एक दिसंबर को गीता जयंती के मौके पर प्रदेश पर में गीता के 15वें अध्याय का वाचन होने जा रहा है। प्रदेश सरकार विश्व रिकार्ड बनाने की योजना तैयार कर रही है। भोपाल में भी गीता पाठ का व्यापक तरीके से आयोजन किया जा रहा है। इसके लिए सीएम यादव ने शुक्रवार को सीएम हाउस स्थित समत्व भवन में समीक्षा बैठक भी की थी। मजे की बात ये है कि जिन ब्राह्मणों की बेटियों को संतोष वर्मा ने अपशब्द कहे उन्हीं ब्राह्मणों से गीता पाठ कराया जाएगा। प्रदेश के हर मठ-मंदिरों में सरकार की तरफ से न्योता भेजा गया है जिससे बड़ी संख्या में पंडित भोपाल पहुंचे और गीता का पाठ करें। जिस प्रकार से सरकार ब्राह्मणों की बात को अनसुना कर रही है वही ब्राह्मण अब गीता का पाठ भी करते नजर आएंगे। ब्राह्मण वर्ग के पास अपनी बात मनवाने का इतना बड़ा मौका होते हुए भी वो मौके का फायदा नहीं उठाएंगे क्योंकि ब्राह्मण वर्ग ज्ञान का भंडार माना जाता है। धर्म-कर्म की बात आती है तो उसमें ब्राह्मण अपने दायित्व से पीछे कभी नहीं हटता है। लिहाजा सरकार को चाहिए कि ऐसे मौके पर प्रदेश के करोड़ों ब्राह्मणों की भावना का सम्मान करें। और संतोष वर्मा जैसे अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई कर एक नजीर पेस करें। सरकार अगर ऐसा नहीं करती है तो उसका खामियाजा भी सरकार को ही उठाना पड़ा है। जब-जब सरकार से ब्राह्मण वर्ग नाराज हुआ है तब-तब सरकार के सामने समस्या खड़ी हुई है। साल 2018 में यही गलती पूर्व सीएम शिवराज ने की थी जब आरक्षण मामले में भाई के लाल जैसे शब्द का इस्तेमाल कर उन्होंने ब्राह्मणों को चुनौती दी थी और उसके परिणाम स्वरुप 15 साल बाद भाजपा की सरकार चली गई और कांग्रेस की सरकार बनी थी।
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