भोपाल में अघोषित चौकी बनाकर अवैध वसूली का खेल हर वाहन से 500-2000 रुपये की उगाही
मध्यप्रदेश में परिवहन नाके बंद होने के सरकारी दावों के बीच भोपाल में अघोषित चौकी बनाकर वाहनों से अवैध वसूली का बड़ा खेल सामने आया है। राजधानी के आउटर क्षेत्रों में आरटीओ विभाग के निजी एजेंट और शहरी क्षेत्र में ट्रैफिक पुलिस द्वारा अवैध वसूली का खेल खेला जा रहा है और प्रत्येक वाहनों को रोककर 500 से 2000 रुपये तक वसूली की जा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि चेकिंग का काम परिवहन विभाग के संरक्षण में पलने वाले प्राइवेट कटर कर रहे हैं।
मुखबिर की पड़ताल में खुलासा
मुखबिर.com की टीम ने रात में मौके पर जाकर पूरे खेल का पर्दाफास करने का प्रयास किया है। जिस जगह चेकिंग हो रही है, वहां बीम में झाड़ियां और घना अंधेरा रहता है। अंधेरे का फायदा उठा कर प्राइवेट कटर लाइटिंग से पहले झाड़ियों में छिपे रहते हैं। वाहन गुजरते ही सामने आकर वाहन रोक लेते हैं।
वाहन रोकने वालों से सवाल किया जाता है तो वो उल्टे ड्राइवर को धमकी देते हैं
वाहन रोकने वाले प्राइवेट कर्मचारियों के हाथ में कम रोशनी में इस्तेमाल होने वाली जलती हुई ट्रैफिक बेटन रहती है। मुखबिर ने एक वाहन चालक से सवाल किया तो उसने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "चेकिंग के दौरान हर बार 500 रुपये लिए जाते हैं। पूछने पर कि प्राइवेट कर्मचारी हो तो कहते हैं, 'तुमसे क्या मतलब।' कुछ नहीं सुनते, उल्टे गाड़ी बंद करने और हजार रुपये का चालान बनाने की धमकी देते हैं। मजबूरी में उन्हें देना पड़ता है।" ट्रकों और बसों से तो 2000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
अवैध वसूली में RTO की मिली भगत का अंदेशा
शहर से बाहर बनाए गए आरटीओ कार्यालय में अगर कोई RTO से सवाल जवाब करने पहुंच जाए तो वो उसे उल्टे धमकी देते हैं। उनके पीछे एक गनर भी खड़ा रहता है जो अप्रत्यक्ष तरीके से डराने का काम करता है। जिस प्रकार से भोपाल आरटीओ कार्यालय में निजी एजेंसियों से सुरक्षा कर्मी हायर किए गए हैं वो भी सवालों के दायरे में है। उनके वेतन का कौन भुगतान करता है उसकी भी जानकारी नहीं दी जाती है।
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