विवेक को 'आशीष' मिलते ही उसने परदे के पीछे रह कर भी भाजपा की रीति-नीति को पर्दे के सामने जीवंत करने का काम किया
ये कहानी है भाजपा के उस कार्यकर्ता की जो पर्दे के पीछे रह कर पर्दों को संवारने का काम करता है। बात हो रही है भाजपा मीडिया विभाग में को-आर्डिनेशन का काम संभाल रहे विवेक शर्मा की। जिसने दतिया जैसे छोटे स्थान से राजधानी में आकर पत्रकारिता का ककहरा सीखा। कुछ साल पत्रकारिता करने के बाद उसने भाजपा में काम करना शुरु कर दिया। विवेक की काबिलियत को पहचानने वाले प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने भी को-आर्डिनेशन का काम दिया। जो टीवी चैनलों में प्रवक्ताओं को भेजने की महत्वपूर्ण ड्यूटी को अंजाम देता है। चेहरे पर हमेशा मुस्कान लिए विवेक जब किसी पत्रकार से मिलते हैं तो यही पूछते हैं कि जो गेस्ट दिया था वो ठीक थे कि नहीं। कई बार विवेक को चैनलों की नाराजगी भी झेलनी पड़ती है लेकिन समय के साथ विवेक का जिस प्रकार से अनुभव बढ़ता जा रहा है और जिस प्रकार से प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल का विवेक की काबिलियत पर विश्वास है वो दर्शाता है कि जब गुरु अच्छा हो तो चेला भी अच्छा ही होगा। विवेक आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। पार्टी के अन्य कार्यकर्ता प्रदेश कार्यालय में केक कटवा कर खुशी मनाते हैं। लेकिन विवेक चमक-दमक से दूर अपने माता पिता की छाया में अपना जन्मदिन मना रहे हैं।
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