बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति को लेकर बैठकों का दौर तेज आपसी समन्वय बना कर कार्यसमिति जारी करने बन रही योजना
मध्य प्रदेश भाजपा एक-एक करके नियुक्तियों के आखिरी पड़ाव पर पहुंचने का प्रयास कर रही है। बहुप्रतीक्षित निगम-मंडलों की सूची जारी होने के बाद अब सबकी नजरें प्रदेश कार्यसमिति पर टिक गई हैं। जिन नेताओं के हाथ अब तक खाली हैं वो नेता अब प्रदेश कार्यसमिति में शामिल होने के लिए एक से दूसरे बंगले झांकते नजर आ रहे हैं। लेकिन प्रदेश कार्यसमिति से पहले जिलों की कार्यकारिणी घोषित करने पर जोर दिया जा रहा है। तीन दिन पहले बीजेपी प्रदेश कार्यालय में हुई बैठक में जोर दिया गया कि जिन जिलों की कार्यकारिणी घोषित नहीं हुई है उन जिलों की कार्यकारिणी को तत्काल घोषित किया जाए। प्रदेश नेतृत्व चाहता है कि जिलों की नियुक्ति के बाद प्रदेश कार्यसमिति पर जोर दिया जाना चाहिए। जिससे नेताओं के बीच बढ़ती नाराजगी को रोका जा सके। दरअसल जिस प्रकार से निगम-मंडलों की नियुक्ति हुई और जिन नेताओं को शामिल किया गया उनकी उम्मीद पार्टी के नेता नहीं कर रहे थे। लिहाजा पार्टी के अंदर ही अंदर विवाद की स्थिति पनपने लगी है। कार्यकर्ता जुवान नहीं खोल रहे हैं लेकिन नेतृत्व द्वारा दिए जा रहे फैसलों के खिलाफ पार्टी के अंदर बगावत का ज्वार-भांटा उबाल मार रहा है। Mukhbir को मिली सूचना के अनुसार करीब 108 नामों की प्रदेश कार्यसमिति घोषित करने की योजना है जिसमें सभी जिलों के दो से तीन प्रतिनिधियों को शामिल करने की योजना है। यहां पर एक और दिलचस्प बात फिर देखने को मिलेगी। जिस तरह से निगम-मंडल की नियुक्तियों में ग्वालियर-चंबल का दबदबा देखने को मिला है ठीक उसी प्रकार प्रदेश कार्यसमिति में भी ग्वालियर-चंबल का प्रतिनिधित्व देखने को मिलने वाला है। दूसरे नंबर पर मालवा अंचल रहेगा। मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव खुद प्रदेश कार्यसमिति में दिलचस्पी दिखा रहे हैं मतलब साफ है कि मालवा अंचल का प्रदेश कार्यसमिति में एकाधिकार रहने वाला है। महाकौशल और विंध्य के साथ झुनझुना लगने की पूरी संभावना है।
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