जिन 'ब्राह्मणों' ने भाजपा का बीज रोपित किया उन्ही ब्राह्मणों की अस्मिता को भाजपा की सरकार में किया जा रहा तार-तार
भारतीय जनता पार्टी की तरफ से मुस्लिमों को टारगेट किया जाता था लेकिन अब वो मुद्दा सफल नहीं हुआ तो ब्राह्मण वर्ग को ही टारगेट में ले लिया गया। सनातन का चोला ओढ़ कर चलने वाली भाजपा अपने कट्टर सनातनियों को ही अब निशाने पर ले रही है। भाजपा के नेताओं की जुवान से भले किसी ब्राह्मण वर्ग के लिए कुछ ग़लत न निकला हो लेकिन जब से भाजपा की सरकार का रिपीट होना शुरु हुआ है तभी से देश के अलग-अलग राज्यों सहित मध्य प्रदेश में भी ब्राह्मणों को साफ्ट टारगेट के रुप में इस्तेमाल किया जा रहा है। आए दिन कोई भी ब्राह्मणों पर अशोभनीय टिप्पड़ी करके अपना सीना चौड़ा करके नेता बन रहा है और सरकार मौन होकर अपनी स्वीकृति प्रदान कर रही है। अभी तक फाइल्स बना कर मुस्लिमों को टारगेट में लिया जा रहा था और अब ठीक उसी प्रकार से वेब सीरीज बना कर 'घूसखोर पंडत' जैसी फिल्में आ रही हैं और सरकार इस पूरे मामले में मौन है। किसी नेता से इस विषय पर बात हो तो वो यही कह कर निकल जाता है कि किसी भी वर्ग और समाज को आहत करने वाली फिमें नहीं बननी चाहिए। लेकिन सरकार होने के बाद भी कोई एक्शन नहीं लिया जाता है। मतलब साफ है कि कहीं न कहीं भारतीय जनता पार्टी की सरकार ब्राह्मणों के खिलाफ हो रहे विरोध को मौन स्वीकृति दे रही है। सबसे गंभीर बात यह है कि केन्द्र से लेकर राज्य स्तर तक ब्राह्मण वर्ग के सैकड़ों सांसद और विधायक हैं लेकिन उनकी जुवान पर इसलिए लकवा मार गया है कि अगर वो कुछ बोलेंगे तो पार्टी के निशाने पर आ जाएंगे। अपने निहित और व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए ब्राह्मण का चोला पहन कर चलने वाले नेता चुप हैं और उसी का फायदा दूसरे वर्ग के लोग लगातार उठा रहे हैं। देश भर में ब्राह्मण वर्ग के खिलाफ एक माहौल तैयार किया जा रहा है। उसके बाद भी सरकार की नींद नहीं खुल रही है। भाजपा के नेता शायद ये भूल गए हैं कि जिन लोगों ने उनकी पार्टी का बीज रोपित किया था वो सब ब्राह्मण ही थे। अगर उन नेताओं ने किसी वर्ग का विरोध किया होता तो क्या मोदी और अमित शाह सहित मध्य प्रदेश में शिवराज और फिर मोहन यादव सीएम की कुर्सी पर बैठे होते। कहते हैं कि जब नाश मनुस पर छाता है तो विवेक पहले मर जाता है। यह कहावत आज भाजपा पर चरितार्थ हो रही है। जब तक भाजपा इस मामले में संभलेगी तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। क्योंकि इस बार ब्राह्मणों की अस्मिता पर हमला किया गया है जिन्होने देश को संवारने में अपना जीवन खपा दिया। शायद भाजपा यह भूल गई है कि 1857 में ब्राह्मण वर्ग से आने वाले मंगल पांडे ने ही आजादी की अलख जगाई थी। और उन्हीं के नक्शे कदम पर चलते हुए लाखों ब्राह्मणों ने आजादी के लिए अपना खून बहा दिया। आज उन्ही ब्राह्मणों को राजनीति का केन्द्र बना लिया गया है।
What's Your Reaction?