भाजपा ने बढ़ते असंतोष को रोकने के लिए बनाया नया रास्ता 'सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे' पढ़िए मुखबिर पर पूरी खबर
मध्य प्रदेश भाजपा एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुकी है जहां ने नए चेहरों को आगे करने का काम किया जा रहा है लेकिन जो पुराने चेहरे हैं और वो पार्टी के लिए समस्या बन सकते हैं उन्हें भी अर्जेस्ट करने की कवायद की जा रही है जिससे मिशन 2028 को झटका न लगे। गुरुवार को वित्त आयोग के अध्यक्ष के रुप में हुई पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया की नियुक्ति यह इशारा करने के लिए काफी है कि भाजपा की सरकार और संगठन में अब असंतोष को खत्म करने की कवायद शुरु कर दी गई है। आगे चल कर मंत्रिमंडल का विस्तार भी होना है ऐसी स्थिति में भाजपा के कई सीनियर नेता और कांग्रेस से आए कुछ नेता खुद को मंत्रिमंडल में शामिल करने की कवायद कर रहे हैं। लेकिन मंत्रिमंडल में तीन अथवा चार नेताओं को ही अर्जेस्ट किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में पार्टी के अंदर असंतोष की भावना बढ़ सकती है जो साल 2028 में पार्टी के लिए ख़तरनाक साबित हो सकती है। और यही कारण है कि भाजपा ने अभी तक निगम-मंडल के दांव को बचा रखा है। Mukhbir को मिली सूचना के अनुसार भाजपा अब ऐसे वरिष्ठ नेताओं को निगम-मंडल में अर्जेस्ट करने की योजना बना रही है जो मंत्री पद के दावेदार हैं लेकिन अब मोहन कैबिनेट में वो फिट नहीं बैठ रहे हैं। ऐसे नेताओं में सबसे सीनियर नेता गोपाल भार्गव,अजय विश्नोई,लक्ष्मण सिंह गौड़,बृजेन्द्र सिंह यादव और अर्चना चिटनीस जैसे नेता शामिल हैं। इन नेताओं को भाजपा अब निगम मंडल में शामिल कर इनके मंत्रिमंडल में शामिल होने के सपने को चकनाचूर करने के मूड में हैं। यह काम कर भाजपा का संगठन और सरकार नए और पुराने चेहरों के बीच सामंजस्य स्थापित करना चाहता है। क्योंकि मंत्रिमंडल में अब भाजपा लगातार ने चेहरों को मौका देना चाहती है जिससे दवी हुई प्रतिभाओं को उचित स्थान मिल सके। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन जयभान सिंह पवैया की नियुक्ति कर भाजपा के नेतृत्व ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि सभी नेताओं पार्टी लेकर आगे बढ़ना चाहती है। बदलाव भी करना जरुरी है और बदलाव के बीच उपज रहे विरोधाभास को भी रोकना जरुरी है। इसी लिए अब भाजपा ने बीच का रास्ता निकाल लिया है। यह रास्ता अपना कर भाजपा ने साबित कर दिया है कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे।
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